About Me

My photo
Varanasi, UP, India
Working with an MNC called Network 18, some call it news channel(IBN7), but i call it दफ्तर, journalist by heart and soul, and i question everything..

July 03, 2009

ममता का रेल बजट


आज रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट संसद में पेश किया। उनके इस लोकलुभावन बजट से लोगों में जहां खुशी है वहीं विपक्ष ने भी इसका स्वागत किया है। लोगों के लिए सौगातों का पिटारा खोला

तत्काल सेवा

तत्काल सेवा के अंतर्गत रिजर्वेशन 5 दिन से घटाकर 2 दिन कर दी गई है। वहीं तत्काल चार्ज भी 150 घटाकर 100 रुपए किया गया है। किसी भी श्रेणी में पैसेंजर किराया में बढ़ोत्तरी नहीं, माल ढुलाई किराया में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं।

दूरांतो सेवा

नॉन स्टॉप दूरांतो सेवाओं को शुरू किया जाएगा। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच एसी और नॉन एसी स्लीपर ट्रेनों को शुरू किया जाएगा। 1 दर्जन से अधिक नॉनस्टाप सेवा दूरांतो सेवा शुरू होगी- नई दिल्ली-जम्मूतवी, मुंबई-अहमदाबाद चेन्नई-दिल्ली, नई दिल्ली-लखनऊ, कोलकाता-मुंबई, दिल्ली-इलाहाबाद, दिल्ली-मुंबई, सियालदाह-नई दिल्ली, भुवनेश्वर-दिल्ली, एरनाकुलम-दिल्ली

नई ट्रेनें

विशाखपट्नम-सिकंदराबाद-मुंबई

पुणे डाउन शोलापुर सुपरफास्ट

अंबिकापुर-गांधीधाम-हावड़ा सुपरफास्ट

बिलासपुर-हैदराबाद, त्रिवेंद्र-तिरुनेल्वेली

12 नई नॉनस्टॉप ट्रेनों को कुछ शहरों में फरक्का-दिल्ली एक्सप्रेस, मुंबई-वाराणसी सुपरफास्ट, कोरापुट-राउरकेला, ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी वाया गुना

नई दिल्ली-गुवाहाटी राजधानी वाया मुजफ्फरनगर

रांची-पना जनशताब्दी

कानपुर-नई दिल्ली शताब्दी, शिमोगा-बैंग्लोर इंटरसिटी

कोलकाता मेट्रो का विस्तार होगा

कटरा-काजीगुंड के बीच रेल ट्रैक बिठाने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया गया है।

गंगटोक-शिलॉन्ग लाइन स्टडी पूरी

53 नई लाइनों के लिए प्रस्ताव

ममता ने अपने अभिभाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि देश के दबे कुचले लोगों और राष्ट्र के विकास के लिए रेल कटिबद्ध है। रेलवे बदलाव के साथ चलेगी। और उसे सही बैलेंस के साथ चलने की जरूरत। उन्होंने ये भी कहा कि सामाजिक तौर पर जरूरी प्रोजेक्टों को शुरू करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा और ऐसे प्रोजेक्ट के लिए पैसा कोई मुद्दा नहीं होगा। रेलवे में कैटरिंग, सही समय, खाना, रेलवे बोगियों की सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा। जनता साफ खाना और पानी देने पर विशेष जोर होगा।

50 विश्व स्तरीय सुविधाओंसे लैस रेलवे स्टेशन बनेंगे-

सीएसटी मुंबई, पुणे, नागपुर, हावड़ा, सियालदाह भुवनेश्वर, नऊ दिल्ली, लखनऊ, चेन्नई, गुवाहाटी, त्रिवेंद्रम, सिकंदराबाद, तिरुपुर, बैंगलोग सिटी, बैंगलोर, अहमदाबाद, हबीबगंड, आगरा, मथुरा, चंडीगढ़, कोलकाता, न्यू जलपाईगुड़ी, आनंदविहार, पुरी, कोच्ची।

370 में से 309 स्टेशनों पर विकास के कार्य होंगेI इन स्टेशनों पर मल्टी फंकशनल सेवाओं को शुरू किया जाएगा।

49 स्टेशनों का चुनाव धार्मिक और पर्यटन विशेषताओं के लिए चयनित कर विकसित किया जाएगा। अलीपुर, इलाहाबाद, बीकानेर, बिलासपुर, कटक, देहरादून, एरनाकुलम, गांधी धाम, घटशिला, हुजूर साहिब, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जोधपुर, कन्याकुमारी, कटरा, खजुराहो, पल्लकडम, रायबरेली, तिरुचिरापल्ली, विशाखापट्टनम इत्यादि को इस कैटेगरी के अंतर्गत लाया जाएगा।

विकलांग और वृद्ध नाकरिकों के लिए सुविधाओं को लाया जाएगा। उनके लिए विशेष बोगियों का निर्माण कराया जाएगा।

विशेष पैकेज

लंबी दूरी की गाड़ियों में कम से कम एक डॉक्टर की तैनाती की जाएगी। लंबी दूरी की गाड़ियों, राजधानी और शताब्दी में मनोरंजन की व्यावस्था भी की जाएगी। रिलायंस इंफोकॉम, एडलैब्स, टाटा और सहारा टीवी से बात जारी।

पर्यावरण फ्रेंडली पेशाब घरों का ट्रायल जारी है। जल्द ही वैक्यूम ट्वायलट का उपयोग में लाया जाएगा।

200 बड़े और मध्यम स्टेशनों पर ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीन को लगाया जाएगा। अब पैसेंजर 5, 000 पोस्ट ऑफिस से भी कंप्यूटराइज्ड टिकट खरीद सकते हैं। टिकटों के लिए मोबाइल वैन को भी लगाया जाएगा। इंटरसिटी यात्रा के लिए हाईकैपेसिटी डबर डेकर कोचों को शामिल किया जाएगा।

सुरक्षा

सुरक्षा रेलवे की सबसे उपर-130 स्टेशनों पर एक इंटीग्रेटेड सेक्टोरिटी सिस्टम को गठित किया जाएगा ताकि यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता हो सके। एक कमांडो बटालियन को खड़ा किया जाएगा। इस बटालियन में महिलाओं की भी तैनाती होगी।

हर संसदीय सीट पर एक सेंट्रलाइज्ड रिजर्वेशन सिस्टम होगा।

पॉलिसी में बदलाव

रेलवे भर्ती बोर्ड की पॉलिसियों में बदलाव होंगे। बैकलॉग द्वारा एसएसटी सीटों को भरा जाएगा। कर्मचारियों की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ती का प्रयोजन

खिलाड़ियों को रिक्रूटमेंट में हिस्सा। सैम पित्रोदा के नेतृत्व में एक कमिटी का गठन किया जाएगा ताकि ऑप्टिकल फाइबर के उन्नत केबल के इस्तेमाल किया जा सके। रेलवे के प्रिटिंग प्रेसों को उन्नत किया जाएगा। रेलवे मल्टी फंकशनल कॉम्प्लेक्सों का निर्माण करेगी। इनमें शॉपिंग मॉल्स, फूड स्टाल्स, दवा की दुकानों के साथ साथ कई प्रकार के अन्य स्टोरों को देश भर में खोला जा एगा। पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर के लिए मेगा लॉजिस्टीक हब बनाने का प्लान। कोल्ड स्टोरेड की स्थापना को रेलवे बढ़ावा देगा। वेटिंग लिस्ट के टिकटों के एसएमएस अपडेट सेवा शुरू की जाएगी।

जमीन बैंक

जमीन बैंक को शुरू करेगा और उसका उपयोग देश के विकास और कारखाने लगा में किया जाएगा। काचरापारा में राज्य के साथ मिलकर 500 ईएमयू और एमएमयू की सुविधाओं से लैस किया जाएगा। राज्यों के साथ मिलकर नई कोच फैक्टरियों को गठित किया जाएगा। झारखंड और ,बंगाल की सीमा पर एनटीपीसी के साथ मिलकर 1000 मेगावॉट का पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। भारी उद्योग विभाग के मिलकर खराब पड़े वैगनों का फिर से निर्माण कराया जाएगा। दिल्ली-चेन्नई और दिल्ली-मुंबई के बीच सुपरफास्ट पार्सल ट्रेनों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगा। असंगठित क्षेत्र के उन लोगों के लिए जिनकी मासिक आय 1000 रुपए से कम है को 25 रुपए मासिक टिकट दर पर इज्जत नाम से नई स्कीम की शुरूआत की जाएगी। प्रेस के कॉरेपॉन्डेंय्स के लिए रेलवे टिकट में कंशेसन दिया जाएगा। ये कंसेशन साल में एक बार यात्रा के लिए 30 से बढ़कर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है। मदरसों के बच्चों को भी स्टूडेंट कंसेशन स्कीम के अंतर्गत लाया जाएगा।

कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई में लेडीज स्पेशल ट्रेनों को चलाया जाएगा। 299और 399 रुपे किराए की एयरकंडीशन्ड युवा ट्रेनों को शुरू किया जाएगा।

July 02, 2009

गे रिलेशनशिप को मंजूरी

एक फिल्म आई थी दोस्ताना। उस फिल्म में यू तो कुछ खास नहीं था लेकिन फिर भी ये फिल्म जरा हट के थी। कारण इसका कथानक था एक लड़की के पीछे पड़े दो लड़के दुनिया के सामने समलिंगी बनने से भी नहीं हिचकते। हॉलिवुड की एक फिल्म का भी उल्लेख यहां लाजिमी है। ये फिल्म थी टॉम हैंक्स की फिलाडेल्फिया।

भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में समलैंगिकता पर कानूनी पाबंदी है। जिनमें चीन, ग्रीस, टर्की और इटली जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। जबकि ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, और स्पेन में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। ब्रिटेन में 2000 में ही समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दी गई थी। यहां सेना के दरवाज़े भी समलैंगिकों के लिए खुले हैं। ब्रिटेन ने 2005 में समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता दे दी। इसके अलावा फ्रांस, स्विटज़रलैंड और जर्मनी ऐसे देश हैं। जहां समलैंगिकता को कानूनी दर्ज़ा तो नहीं मिला। लेकिन इस पर किसी तरह का प्रतिबंध भी नहीं है। अमेरिका में पिछले कई सालों से समलैंगिकता पर कानूनी बहस छिड़ी हुई है। यहां कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स में इसे मान्यता मिल गई है। लेकिन पूरे देश में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस सब के बीच दुनिया भर में हजारों लोग समलैंगिक अधिकारों को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं।

सरकार का बदलता रवैया भले ही इन लोगों को दो पल की खुशी तो दे दे लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या इनके खुद के मां बाप भाई बहन दोस्त परिवार वाले इन्हें स्वीकारेंगे?

हर साल की तरह इस साल भी रविवार 28 जून को समलैंगिक लोग दिल्ली की सड़कों पर निकले और अपनी पहचान ज़ाहिर की। हालांकी भारत में समलैंगिकता एक अपराध है। फिर भी ये लोग समलैंगिक होने में फख्र महसूस करते हैं। इनके इसी आत्मविशवास की वजह से अब सरकार भी धीरे धीरे ही सही अपना रुख बदलने को मजबूर हो रही है। सदी से ज्यादा पुराने कानून पर सरकार सोचविचार करना चाहती है। लेकिन सच तो ये हैं कि समलैंगिकता को कानूनी दर्जा देने की मांग पर हमेशा सरकार में मतभेद रहे हैं। हांलाकि अब स्वास्थ्य, कानून और गृह मंत्रालय कम से कम इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि इस कानून में बदलाव की ज़रूरत है।

बकौल केंद्रीय कानून मंत्री वीराप्पा मोइली, कानून लोगों को सज़ा देने के लिए नहीं बनाई जाती। इस नज़रिए से हम यह कह सकते हैं कि धारा 377 को भी दोबारा देखने की ज़रूरत है। मोइली की बात ध्यान से सुने तो ये साफ हो जाता है कि उनका इशारा इस तरफ नहीं है कि भारत में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिलने जा रही है। बात की गहराई में जाए तो ये साफ होता है कि सरकार अभी भी सिर्फ धारा 377 में छोटे मोटे हेरफर करके बच निकलना चाहती है। हालांकि मीडिया में रविवार सुबह खबर आई थी उसके मुताबिक सरकार धारा 377 हटाने पर विचार करने वाली है। लेकिन मोइली के ही एक और बयान पर गौर फरमाएं तो साफ हो जाएगा कि इस दोस्ताना को कानूनी मान्यता देने में तकनीकी शब्दों का कितना बड़ा महाजाल है।

वैसे स्वास्थ्य मंत्रालय हमेशा से इस बात की वकालत करता रहा है कि समलैंगिकता को कानूनी दर्जा देने से एड्स और यौनजनित बीमारियों को कम किया जा सकेगा। लेकिन गृह और कानून मंत्रालय अब तक धर्म और परंपरा के नाम पर इसका विरोध करता आया है।

कुछ जानकारों के मुताबिक कानून धार्मिक रीतिरिवाज और वैज्ञानिक तर्क के आधार पर बनाए जाते हैं। समलैंगिकता इन दोनों आधारों पर ही खरी नहीं उतरती। के के सूद, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल कहते हैं कि जिस योनी में इंटरकोर्स किया जाएगा उसे भगवान ने इस काम के लिए नहीं बनाया है। उसे बायोलोजी भी नहीं मानता क्योंकि वहां से प्रोक्रिएशन नहीं हो सकता।

समलिंगी जिंदाबाद

ये हमारी जीत है। आखिर हमारे देश में भी हमें हमारी तरह से जीने का तोहफा मिल ही गया। ये बयान है मशहूर टीवी अदाकारा या अदाकार बॉबी डॉर्लिंग का। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के समलिंगी या यूं कहें गे रिलेशनशिप को मंजूरी दे दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि दो मर्द अगर सहमति से संबंध बनाते हैं तो वो गैरकानूनी नहीं है। अगर इस मामले में धारा 377 के तहत यानी अप्राकृतिक यौनाचार का मामला दर्ज होता है, तो वो संविधान के खिलाफ है। पता हो कि हाईकोर्ट ने ये व्यवस्था दी कि आईपीसी की धारा 377 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का विरोध करती है जो कि किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगा। इसका मतलब ये है कि अब समलैंगिक संबंध गैरकानूनी नहीं रहे। यानी अब समलैंगिकता समाज और कानून की नजर में अपराध नहीं रहा। धारा 377 भी भारत में समलैंगिकता पर रोक नहीं लगा सकी है क्योंकि ये दो लोगों की आपसी रज़ामंदी से होता है। कई विकसित देशों में समलैंगिकता को कानूनी दर्जा मिल चुका है और वहां के समाज ने भी इस हकीकत को स्वीकार कर लिया है।

1860 में बनी आईपीसी की धारा 377 के अनुसार समलैंगिकता एक अपराध है और दोषी पाए जाने पर दस साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता नहीं है।भारत में लंबे समय से समलैंगिकों को मान्यता दिए जाने के लिए मांग उठ रही है। इसके लिए हर साल समलैंगिक देश के अलग अलग हिस्सों में परेड भी करते हैं।

भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में समलैंगिकता पर कानूनी पाबंदी है। जिनमें चीन, ग्रीस, टर्की और इटली जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। जबकि ब्रिटेन, Belgium , Canada , holland , South Africa और Spain में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। ब्रिटेन में 2000 में ही समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दी गई थी। यहां सेना के दरवाज़े भी समलैंगिकों के लिए खुले हैं। ब्रिटेन ने 2005 में समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता दे दी। इसके अलावा फ्रांस, स्विटज़रलैंड और जर्मनी ऐसे देश हैं। जहां समलैंगिकता को कानूनी दर्ज़ा तो नहीं मिला। लेकिन इस पर किसी तरह का प्रतिबंध भी नहीं है। अमेरिका में पिछले कई सालों से समलैंगिकता पर कानूनी बहस छिड़ी हुई है। यहां कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स में इसे मान्यता मिल गई है। लेकिन पूरे देश में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस सब के बीच दुनिया भर में हजारों लोग समलैंगिक अधिकारों को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं।

July 01, 2009

बाबरी विध्वंस-एक काले इतिहास का स्याह पटाक्षेप


लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट आने के साथ ही कांग्रेस और बीजेपी में तू-तू-मैं-मैं तेज हो गई है। बीजेपी को आशंका है कि उसके कई नेताओं की तरफ उंगलियां उठ सकती है। इसलिए वो बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के मामले में कांग्रेस पर उंगली उठा रही है। उधर, कांग्रेस भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने में जुट गई है। लेकिन एक बात तय करनी पड़ेगी कि राजनीति में आखिर नुकसान किसका हुआ। किसने इस उन्माद को झेला, बाबरी विध्वंस में कौन था जो कि उसके मलबे में दब के घुट-घुट कर जी रहा है।

मंगलवार को जस्टिस लिब्राहन ने 17 साल बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। और इसी के साथ विवादों का पिटारा खुल गया। बाबरी मस्जिद तोड़े जाने वक्त बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बीजेपी के मौजूद महासचिव विनय कटियार लिब्राहन आयोग की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं हालांकि अभी रिपोर्ट के नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए हैं। विनय के निशाने पर कांग्रेस की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार भी है।

बीजेपी के इस रुख पर कांग्रेस भला क्यों चुप रहती। उसने भी पलटवार करने में देर नहीं की। मनीष तिवारी ने तो हद ही कर दी। उनका कहना था कि क्या बीजेपी वाले वहां जलेबी लेने गए थे। आरोप प्रत्यारोप में लगता है नेताओं ने गरिमा की तिलांजली ही दे दी। क्या बाबरी विध्वंस एक मजाक था। क्या वो सिर्फ सैर सपाटे के लिए गए कुछ लोगों का उन्माद था। साफ है कि लिब्राहन कमीशन की रिपोर्ट बीजेपी और कांग्रेस के बीच जंग का नया मुद्दा बनने वाली है। ये जंग रिपोर्ट के खुलासे के बाद तेज हो सकती है। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार और नेताओं के बीच छिड़ी जंग से मूर्छित पड़ी बीजेपी इस मुद्दे को भड़काकर अपनी सेहत दुरुस्त करना चाहेगी तो कांग्रेस इस फिराक में है कि आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कार्रवाई करके वो केंद्र में सरकार रहने के बावजूद बाबरी मस्जिद न बचा पाने का दाग धो डाले।

6 दिसंबर, इस एक दिन ने भारतीय राजनीति की धुरी बदल दी। वो दिन जब सैकड़ों कारसेवकों ने कुछ ही घंटों में बाबरी मस्जिद को जमींदोज कर दिया। 17 साल बाद भी ये 6 दिसंबर 1992 का सच आज भी भारतीय लोकतंत्र पर एक शूल की तरह चुभ रहा है। ये वो कहानी है तो जो धर्म की राजनीति की नींव बनीं।

सुबह 11 बजे के करीब कारसेवकों के एक बड़े जत्थे ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें वापस धकेल दिया गया। इसी वक्त वहां नजर आए वीएचपी नेता अशोक सिंघल कारसेवकों से घिरे हुए उन्हें कुछ समझाते हुए थोड़ी ही देर में उनके साथ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी भी जुड़ गए। तुरंत ही इस भीड़ में लाल कृष्ण आडवाणी भी नजर आए। सभी सुरक्षा घेरे के भीतर मौजूद थे और लगातार बाबरी मस्जिद की तरफ बढ़ रहे थे।

तभी पहली बार मस्जिद का बाहरी दरवाजा तोड़ने की कोशिश हुई लेकिन पुलिस ने उसे नाकाम कर दिया। तस्वीरें गवाह हैं कि इस दौरान पुलिस अधिकारी दूर खड़े होकर तमाशा देख रहे थे। मचान पर बैठे हुए इन अफसरों को मस्जिद बचाने की चिंता कितनी थी कहना मुश्किल था। जब प्रशासन ही हाथ पे हाथ धरा बैठा रहा तो फिर उन्मादियों से कौन निपचता। इस वक्त तक सुबह का साढ़े ग्यारह बज चुका था। मस्जिद अब भी सुरक्षित खड़ी थी। तभी वहां पीली पट्टी बांधे कारसेवकों का आत्मघाती दस्ता आ पहुंचा। उसने पहले से मौजूद कारसेवकों को कुछ समझाने की कोशिश की। जैसे वो किसी बड़ी घटना के लिए सबको तैयार कर रहे थे। कुछ ही देर में बाबरी मस्जिद की सुरक्षा में लगी पुलिस की इकलौती टुकड़ी वहां से बाहर निकलती नजर आई। न कोई विरोध न मस्जिद की सुरक्षा की परवाह पुलिस की इस टुकड़ी को दूर मचान पर बैठे पुलिस अधिकारी सिर्फ देखते रहे कुछ किया नहीं। फिर भी ये सवाल उठता है कि क्या सिर्फ तथाकथित हिदुत्व ब्रिगेड के बस की बात थी ये विवादित ढांचा गिरा दिया जाता। क्या बिना सरकार के सहयोग के ये संभव था।

मस्जिद से पुलिस के हटने के तुरंत बाद मेन गेट पर दूसरा और बड़ा धावा बोला गया। जो कुछ पुलिसवाले वहां बचे रह गए थे वो भी पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए। दोपहर 12 बजे एक शंखनाद पूरे इलाके में गूंज उठा। कारसेवकों के नारों की आवाज पूरे इलाके में गूंजती जा रही थी। कारसेवकों का एक बड़ा जत्था मस्जिद की दीवार पर चढ़ने लगा बाड़े में लगे गेट का ताला भी तोड़ दिया गया कुछ ही देर में मस्जिद कारसेवकों के कब्जे में थी।

तत्कालीन एसएसपी डीबी राय पुलिसवालों को मुकाबला करने के लिए कह रहे थे लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। उस वक्त भी ये सवाल उठा था कि क्या ये पुलिस का विद्रोह था और ये सवाल आज भी मुंह बाए खड़ा है। क्या पुलिस भी चाहती थी कि विवादित ढांचा गिरा दिया जाए। क्या ये विद्रोह था उस मुस्लिम शासन के खिलाफ जो कि कई सालों तक मंदिरों को तोड़ कर लूटपाट कर अपनी खजाना भरते रहे। इस वक्त तक पुलिसवाले पूरी तरह हथियार डाल चुके थे। कुदाल लिए हुए कारसेवक तब तक मस्जिद गिराने का काम शुरु कर चुके थे। एक दिन पहले की गई रिहर्सल काम आई और कुछ ही घंटों में बाबरी मस्जिद को पूरी तरह ढहा दिया गया।

June 29, 2009

फिर सरेंडर का ढोंग, राज पहुंचे कोर्ट


मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने कल्याण कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज ठाकरे ऐसा करने को मजबूर हुए हैं। साल 2008 के अक्टूबर में उत्तर भारत से रेलवे की परीक्षा देने आए छात्रों के साथ मारपीट हुई थी। ये मारपीट कल्याण इलाके में हुई थी। आरोप है कि राज ठाकरे के कहने पर एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें परीक्षा देने से रोका था और उनके साथ मारपीट की थी। हाई कोर्ट ने राज ठाकरे से सरेंडर करने को कहा था। अब देखना ये है कि कोर्ट से राज को जमानत मिलेगी या फिर उन्हें जेल जाना होगा।

भड़काऊ भाषण के मामले में राज ठाकरे का कोई सानी नहीं है। कभी मराठा छत्रप बाला साहब ठाकरे के दाहिने हाथ रहे राज ने जब शिवसेना छोड़ महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का गठन किया तो उन्हें भी अपनी जमीन बनाने के लिए अपने चाचा की तरह कुछ ऐसा करना था जिससे वो मराठियों का विश्वास हासिल कर सकें। हालिया लोकसभा चुनाव में वो कुछ हद तक सफल भी हो गए थे।

पिछली सुनवाई के समय बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज ठाकरे को आदेश दिया था कि उन्हें हर हाल में कल्याण रेलवे कोर्ट में 29 जून तक सरेंडर करना है। 24 अक्टूबर 2008 को कल्याण रेलवे स्टेशन पर एमएनएस कार्यकर्ताओं ने जमकर मारपीट की थी। आरोप है कि राज ठाकरे के इशारे पर रेलवे की परीक्षा देने आए उत्तर भारतीय छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।

कल्याण कोर्ट में राज के खिलाफ 153बी, 153 सी और 412 के तहत कार्रवाई की गई। तीनों धाराएं गैरजमानती हैं। इसके बाद कल्याण पुलिस ने राज ठाकरे को गिरफ्तार किया और राज ठाकरे को एक दिन जेल में भी बिताना पड़ा। बाद में इसी मामले में राज ठाकरे को कल्याण की निचली अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई। राज्य सरकार ने राज ठाकरे की अंतरिम जमानत को रद्द करने की अपील हाईकोर्ट में की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज ठाकरे की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए 29 जून तक सरेंडर करने का आदेश दिया।

राज ठाकरे के वकील के मुताबिक जैसे ही राज ठाकरे कोर्ट में सरेंडर करेंगे ठीक उसी वक्त उनकी जमानत की अर्जी भी दाखिल कर दी जाएगी। कल्याण कोर्ट में दायर मुकदमा तो राज ठाकरे के कारनामों का एक छोटा सा नमूना है। उनपर दायर मुकदमों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। ज्यादातर मामलों में भड़काऊ भाषण और माहौल खराब करने के आरोप है। अब देखना ये है कि क्या सरेंडर करने के बाद एक बार फिर राज ठाकरे जमानत हासिल करने में कामयाब हो जाएंगे।

Followers