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Varanasi, UP, India
Working with an MNC called Network 18, some call it news channel(IBN7), but i call it दफ्तर, journalist by heart and soul, and i question everything..

July 03, 2009

ममता का रेल बजट


आज रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट संसद में पेश किया। उनके इस लोकलुभावन बजट से लोगों में जहां खुशी है वहीं विपक्ष ने भी इसका स्वागत किया है। लोगों के लिए सौगातों का पिटारा खोला

तत्काल सेवा

तत्काल सेवा के अंतर्गत रिजर्वेशन 5 दिन से घटाकर 2 दिन कर दी गई है। वहीं तत्काल चार्ज भी 150 घटाकर 100 रुपए किया गया है। किसी भी श्रेणी में पैसेंजर किराया में बढ़ोत्तरी नहीं, माल ढुलाई किराया में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं।

दूरांतो सेवा

नॉन स्टॉप दूरांतो सेवाओं को शुरू किया जाएगा। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच एसी और नॉन एसी स्लीपर ट्रेनों को शुरू किया जाएगा। 1 दर्जन से अधिक नॉनस्टाप सेवा दूरांतो सेवा शुरू होगी- नई दिल्ली-जम्मूतवी, मुंबई-अहमदाबाद चेन्नई-दिल्ली, नई दिल्ली-लखनऊ, कोलकाता-मुंबई, दिल्ली-इलाहाबाद, दिल्ली-मुंबई, सियालदाह-नई दिल्ली, भुवनेश्वर-दिल्ली, एरनाकुलम-दिल्ली

नई ट्रेनें

विशाखपट्नम-सिकंदराबाद-मुंबई

पुणे डाउन शोलापुर सुपरफास्ट

अंबिकापुर-गांधीधाम-हावड़ा सुपरफास्ट

बिलासपुर-हैदराबाद, त्रिवेंद्र-तिरुनेल्वेली

12 नई नॉनस्टॉप ट्रेनों को कुछ शहरों में फरक्का-दिल्ली एक्सप्रेस, मुंबई-वाराणसी सुपरफास्ट, कोरापुट-राउरकेला, ग्वालियर-भोपाल इंटरसिटी वाया गुना

नई दिल्ली-गुवाहाटी राजधानी वाया मुजफ्फरनगर

रांची-पना जनशताब्दी

कानपुर-नई दिल्ली शताब्दी, शिमोगा-बैंग्लोर इंटरसिटी

कोलकाता मेट्रो का विस्तार होगा

कटरा-काजीगुंड के बीच रेल ट्रैक बिठाने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया गया है।

गंगटोक-शिलॉन्ग लाइन स्टडी पूरी

53 नई लाइनों के लिए प्रस्ताव

ममता ने अपने अभिभाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि देश के दबे कुचले लोगों और राष्ट्र के विकास के लिए रेल कटिबद्ध है। रेलवे बदलाव के साथ चलेगी। और उसे सही बैलेंस के साथ चलने की जरूरत। उन्होंने ये भी कहा कि सामाजिक तौर पर जरूरी प्रोजेक्टों को शुरू करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा और ऐसे प्रोजेक्ट के लिए पैसा कोई मुद्दा नहीं होगा। रेलवे में कैटरिंग, सही समय, खाना, रेलवे बोगियों की सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा। जनता साफ खाना और पानी देने पर विशेष जोर होगा।

50 विश्व स्तरीय सुविधाओंसे लैस रेलवे स्टेशन बनेंगे-

सीएसटी मुंबई, पुणे, नागपुर, हावड़ा, सियालदाह भुवनेश्वर, नऊ दिल्ली, लखनऊ, चेन्नई, गुवाहाटी, त्रिवेंद्रम, सिकंदराबाद, तिरुपुर, बैंगलोग सिटी, बैंगलोर, अहमदाबाद, हबीबगंड, आगरा, मथुरा, चंडीगढ़, कोलकाता, न्यू जलपाईगुड़ी, आनंदविहार, पुरी, कोच्ची।

370 में से 309 स्टेशनों पर विकास के कार्य होंगेI इन स्टेशनों पर मल्टी फंकशनल सेवाओं को शुरू किया जाएगा।

49 स्टेशनों का चुनाव धार्मिक और पर्यटन विशेषताओं के लिए चयनित कर विकसित किया जाएगा। अलीपुर, इलाहाबाद, बीकानेर, बिलासपुर, कटक, देहरादून, एरनाकुलम, गांधी धाम, घटशिला, हुजूर साहिब, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जोधपुर, कन्याकुमारी, कटरा, खजुराहो, पल्लकडम, रायबरेली, तिरुचिरापल्ली, विशाखापट्टनम इत्यादि को इस कैटेगरी के अंतर्गत लाया जाएगा।

विकलांग और वृद्ध नाकरिकों के लिए सुविधाओं को लाया जाएगा। उनके लिए विशेष बोगियों का निर्माण कराया जाएगा।

विशेष पैकेज

लंबी दूरी की गाड़ियों में कम से कम एक डॉक्टर की तैनाती की जाएगी। लंबी दूरी की गाड़ियों, राजधानी और शताब्दी में मनोरंजन की व्यावस्था भी की जाएगी। रिलायंस इंफोकॉम, एडलैब्स, टाटा और सहारा टीवी से बात जारी।

पर्यावरण फ्रेंडली पेशाब घरों का ट्रायल जारी है। जल्द ही वैक्यूम ट्वायलट का उपयोग में लाया जाएगा।

200 बड़े और मध्यम स्टेशनों पर ऑटोमैटिक वेंडिंग मशीन को लगाया जाएगा। अब पैसेंजर 5, 000 पोस्ट ऑफिस से भी कंप्यूटराइज्ड टिकट खरीद सकते हैं। टिकटों के लिए मोबाइल वैन को भी लगाया जाएगा। इंटरसिटी यात्रा के लिए हाईकैपेसिटी डबर डेकर कोचों को शामिल किया जाएगा।

सुरक्षा

सुरक्षा रेलवे की सबसे उपर-130 स्टेशनों पर एक इंटीग्रेटेड सेक्टोरिटी सिस्टम को गठित किया जाएगा ताकि यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता हो सके। एक कमांडो बटालियन को खड़ा किया जाएगा। इस बटालियन में महिलाओं की भी तैनाती होगी।

हर संसदीय सीट पर एक सेंट्रलाइज्ड रिजर्वेशन सिस्टम होगा।

पॉलिसी में बदलाव

रेलवे भर्ती बोर्ड की पॉलिसियों में बदलाव होंगे। बैकलॉग द्वारा एसएसटी सीटों को भरा जाएगा। कर्मचारियों की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ती का प्रयोजन

खिलाड़ियों को रिक्रूटमेंट में हिस्सा। सैम पित्रोदा के नेतृत्व में एक कमिटी का गठन किया जाएगा ताकि ऑप्टिकल फाइबर के उन्नत केबल के इस्तेमाल किया जा सके। रेलवे के प्रिटिंग प्रेसों को उन्नत किया जाएगा। रेलवे मल्टी फंकशनल कॉम्प्लेक्सों का निर्माण करेगी। इनमें शॉपिंग मॉल्स, फूड स्टाल्स, दवा की दुकानों के साथ साथ कई प्रकार के अन्य स्टोरों को देश भर में खोला जा एगा। पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर के लिए मेगा लॉजिस्टीक हब बनाने का प्लान। कोल्ड स्टोरेड की स्थापना को रेलवे बढ़ावा देगा। वेटिंग लिस्ट के टिकटों के एसएमएस अपडेट सेवा शुरू की जाएगी।

जमीन बैंक

जमीन बैंक को शुरू करेगा और उसका उपयोग देश के विकास और कारखाने लगा में किया जाएगा। काचरापारा में राज्य के साथ मिलकर 500 ईएमयू और एमएमयू की सुविधाओं से लैस किया जाएगा। राज्यों के साथ मिलकर नई कोच फैक्टरियों को गठित किया जाएगा। झारखंड और ,बंगाल की सीमा पर एनटीपीसी के साथ मिलकर 1000 मेगावॉट का पॉवर प्लांट लगाया जाएगा। भारी उद्योग विभाग के मिलकर खराब पड़े वैगनों का फिर से निर्माण कराया जाएगा। दिल्ली-चेन्नई और दिल्ली-मुंबई के बीच सुपरफास्ट पार्सल ट्रेनों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगा। असंगठित क्षेत्र के उन लोगों के लिए जिनकी मासिक आय 1000 रुपए से कम है को 25 रुपए मासिक टिकट दर पर इज्जत नाम से नई स्कीम की शुरूआत की जाएगी। प्रेस के कॉरेपॉन्डेंय्स के लिए रेलवे टिकट में कंशेसन दिया जाएगा। ये कंसेशन साल में एक बार यात्रा के लिए 30 से बढ़कर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है। मदरसों के बच्चों को भी स्टूडेंट कंसेशन स्कीम के अंतर्गत लाया जाएगा।

कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई में लेडीज स्पेशल ट्रेनों को चलाया जाएगा। 299और 399 रुपे किराए की एयरकंडीशन्ड युवा ट्रेनों को शुरू किया जाएगा।

July 02, 2009

गे रिलेशनशिप को मंजूरी

एक फिल्म आई थी दोस्ताना। उस फिल्म में यू तो कुछ खास नहीं था लेकिन फिर भी ये फिल्म जरा हट के थी। कारण इसका कथानक था एक लड़की के पीछे पड़े दो लड़के दुनिया के सामने समलिंगी बनने से भी नहीं हिचकते। हॉलिवुड की एक फिल्म का भी उल्लेख यहां लाजिमी है। ये फिल्म थी टॉम हैंक्स की फिलाडेल्फिया।

भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में समलैंगिकता पर कानूनी पाबंदी है। जिनमें चीन, ग्रीस, टर्की और इटली जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। जबकि ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, हॉलैंड, दक्षिण अफ्रीका, और स्पेन में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। ब्रिटेन में 2000 में ही समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दी गई थी। यहां सेना के दरवाज़े भी समलैंगिकों के लिए खुले हैं। ब्रिटेन ने 2005 में समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता दे दी। इसके अलावा फ्रांस, स्विटज़रलैंड और जर्मनी ऐसे देश हैं। जहां समलैंगिकता को कानूनी दर्ज़ा तो नहीं मिला। लेकिन इस पर किसी तरह का प्रतिबंध भी नहीं है। अमेरिका में पिछले कई सालों से समलैंगिकता पर कानूनी बहस छिड़ी हुई है। यहां कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स में इसे मान्यता मिल गई है। लेकिन पूरे देश में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस सब के बीच दुनिया भर में हजारों लोग समलैंगिक अधिकारों को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं।

सरकार का बदलता रवैया भले ही इन लोगों को दो पल की खुशी तो दे दे लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या इनके खुद के मां बाप भाई बहन दोस्त परिवार वाले इन्हें स्वीकारेंगे?

हर साल की तरह इस साल भी रविवार 28 जून को समलैंगिक लोग दिल्ली की सड़कों पर निकले और अपनी पहचान ज़ाहिर की। हालांकी भारत में समलैंगिकता एक अपराध है। फिर भी ये लोग समलैंगिक होने में फख्र महसूस करते हैं। इनके इसी आत्मविशवास की वजह से अब सरकार भी धीरे धीरे ही सही अपना रुख बदलने को मजबूर हो रही है। सदी से ज्यादा पुराने कानून पर सरकार सोचविचार करना चाहती है। लेकिन सच तो ये हैं कि समलैंगिकता को कानूनी दर्जा देने की मांग पर हमेशा सरकार में मतभेद रहे हैं। हांलाकि अब स्वास्थ्य, कानून और गृह मंत्रालय कम से कम इस बात पर राज़ी हो गए हैं कि इस कानून में बदलाव की ज़रूरत है।

बकौल केंद्रीय कानून मंत्री वीराप्पा मोइली, कानून लोगों को सज़ा देने के लिए नहीं बनाई जाती। इस नज़रिए से हम यह कह सकते हैं कि धारा 377 को भी दोबारा देखने की ज़रूरत है। मोइली की बात ध्यान से सुने तो ये साफ हो जाता है कि उनका इशारा इस तरफ नहीं है कि भारत में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिलने जा रही है। बात की गहराई में जाए तो ये साफ होता है कि सरकार अभी भी सिर्फ धारा 377 में छोटे मोटे हेरफर करके बच निकलना चाहती है। हालांकि मीडिया में रविवार सुबह खबर आई थी उसके मुताबिक सरकार धारा 377 हटाने पर विचार करने वाली है। लेकिन मोइली के ही एक और बयान पर गौर फरमाएं तो साफ हो जाएगा कि इस दोस्ताना को कानूनी मान्यता देने में तकनीकी शब्दों का कितना बड़ा महाजाल है।

वैसे स्वास्थ्य मंत्रालय हमेशा से इस बात की वकालत करता रहा है कि समलैंगिकता को कानूनी दर्जा देने से एड्स और यौनजनित बीमारियों को कम किया जा सकेगा। लेकिन गृह और कानून मंत्रालय अब तक धर्म और परंपरा के नाम पर इसका विरोध करता आया है।

कुछ जानकारों के मुताबिक कानून धार्मिक रीतिरिवाज और वैज्ञानिक तर्क के आधार पर बनाए जाते हैं। समलैंगिकता इन दोनों आधारों पर ही खरी नहीं उतरती। के के सूद, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल कहते हैं कि जिस योनी में इंटरकोर्स किया जाएगा उसे भगवान ने इस काम के लिए नहीं बनाया है। उसे बायोलोजी भी नहीं मानता क्योंकि वहां से प्रोक्रिएशन नहीं हो सकता।

समलिंगी जिंदाबाद

ये हमारी जीत है। आखिर हमारे देश में भी हमें हमारी तरह से जीने का तोहफा मिल ही गया। ये बयान है मशहूर टीवी अदाकारा या अदाकार बॉबी डॉर्लिंग का। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के समलिंगी या यूं कहें गे रिलेशनशिप को मंजूरी दे दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि दो मर्द अगर सहमति से संबंध बनाते हैं तो वो गैरकानूनी नहीं है। अगर इस मामले में धारा 377 के तहत यानी अप्राकृतिक यौनाचार का मामला दर्ज होता है, तो वो संविधान के खिलाफ है। पता हो कि हाईकोर्ट ने ये व्यवस्था दी कि आईपीसी की धारा 377 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का विरोध करती है जो कि किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं होगा। इसका मतलब ये है कि अब समलैंगिक संबंध गैरकानूनी नहीं रहे। यानी अब समलैंगिकता समाज और कानून की नजर में अपराध नहीं रहा। धारा 377 भी भारत में समलैंगिकता पर रोक नहीं लगा सकी है क्योंकि ये दो लोगों की आपसी रज़ामंदी से होता है। कई विकसित देशों में समलैंगिकता को कानूनी दर्जा मिल चुका है और वहां के समाज ने भी इस हकीकत को स्वीकार कर लिया है।

1860 में बनी आईपीसी की धारा 377 के अनुसार समलैंगिकता एक अपराध है और दोषी पाए जाने पर दस साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता नहीं है।भारत में लंबे समय से समलैंगिकों को मान्यता दिए जाने के लिए मांग उठ रही है। इसके लिए हर साल समलैंगिक देश के अलग अलग हिस्सों में परेड भी करते हैं।

भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देशों में समलैंगिकता पर कानूनी पाबंदी है। जिनमें चीन, ग्रीस, टर्की और इटली जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। जबकि ब्रिटेन, Belgium , Canada , holland , South Africa और Spain में समलैंगिकता को कानूनी मान्यता मिल चुकी है। ब्रिटेन में 2000 में ही समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दी गई थी। यहां सेना के दरवाज़े भी समलैंगिकों के लिए खुले हैं। ब्रिटेन ने 2005 में समलैंगिक शादी को भी कानूनी मान्यता दे दी। इसके अलावा फ्रांस, स्विटज़रलैंड और जर्मनी ऐसे देश हैं। जहां समलैंगिकता को कानूनी दर्ज़ा तो नहीं मिला। लेकिन इस पर किसी तरह का प्रतिबंध भी नहीं है। अमेरिका में पिछले कई सालों से समलैंगिकता पर कानूनी बहस छिड़ी हुई है। यहां कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स में इसे मान्यता मिल गई है। लेकिन पूरे देश में इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस सब के बीच दुनिया भर में हजारों लोग समलैंगिक अधिकारों को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं।

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