About Me

My photo
Varanasi, UP, India
Working with an MNC called Network 18, some call it news channel(IBN7), but i call it दफ्तर, journalist by heart and soul, and i question everything..
Showing posts with label mother poem. Show all posts
Showing posts with label mother poem. Show all posts

April 29, 2009

आराम

जब हुआ चिंतित

अकिंचन इस वन में

कोई आवाज ना आई

किसी ने पुकारा नहीं

आगे बढ़ा बढ़ता गया

किसी की तलाश में

शायद कहीं वो मिलेगा

मगर मिलता नहीं

फिर भी ढूंढता हूं कि

कहीं मिल जाएगा

कोई ठौर ठिकाना

वहां जहां मिलेगा थोड़ा

आराम

July 25, 2008

वो बूढ़ी सी अम्मा

वो बूढ़ी सी अम्मा
गोरी से पीली
पीली से काली हो गई हैं अम्मा
इक दिन मैंने देखा
सचमुच बूढ़ी हो गई है अम्मा।
कुछ बादल बेटे ने लूटे
कुछ हरियाली बेटी ने
एक नदी थी
कहां खो गई रेती हो गई हैं अम्मा
देख लिया है सोना चांदी
जब से उसके बक्से में
तब से बेटों की नजरों
अच्छी हो गई हैं अम्मा।
कल तक अम्मा अम्मा कहते
फिरते थे जिसके पीछे
आज उन्हीं बच्चों के आगे
बच्ची हो गई है अम्मा।
घर के हर इक फर्द की आँखों में
दौलत का चश्मा हैं
सबको दिखता वक्त कीमती
सस्ती हो गई अम्मा।
बोझ समझते थे सब
भारी लगती थी लेकिन जब से
अपने सर का साया समझा
हल्की हो गई अम्मा।---------------

Followers