काफी जद्दोजहद और वाद विवाद के बाद आखिरकार रीता बहुगुणा जोशी को जमानत मिल ही गई। इस हाईप्रोफाइल गालीगलौज का पटाक्षेप इससे बेहतर और कुछ शायद राजनीतिक पंडितों ने नहीं सोचौ होगा। या फिर यूं कहें कि इस गालीगलौज के नाटक की स्क्रिप्टिंग इससे बेहतर नहीं हो सकती था। इस विवाद से एक बात तो सामने आ गई कि गाली गलौज करने के मामले में कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का फेहरिस्त में शामिल हो गई। हालांकि इस सब में एख शख्स ऐसा था जिसे सिर्फ रीता की जमानत से मतलब था। उसे इस कांड पर होरही राजनीति से कोई लेनादेना नहीं था। वो कोई औऱ नहीं रीता का बेटा मयंक था। मां रीता बहुगुणा को जमानत मिलने के बाद बेटा मयंक भी बेहद खुश नजर आया। सुबह मां से जब मिलने मयंक गया था, तब वो बिल्कुल अकेला था। उसके साथ कांग्रेस के एक भी नेता नहीं था। लेकिन इस वक्त खुशी के लम्हे में वो भीड़ से घिरा था।
इससे पहले आज लखनऊ में रीता की रिहाई और उनके घर पर आगजनी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेसियों ने प्रदर्शन किया था। दूसरी तरफ वाराणसी में भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
रीता बहुगुणा को जमानत मिलने के बाद अब कांग्रेस के निशाने पर पूरी तरह से माया सरकार और उसके विधायक होंगे। कांग्रेस की पूरी कोशिश होगी कि रीता बहुगुणा के घर आग लगाने वाले मुद्दे को हवा दी जाए। और उसके लिए केंद्र सरकार किसी भी मामले में बैकफुट पर आने के मूड में नहीं दिख रही है। अपनी पॉवर और पहुंच का फायदा उठाते हुए सरकारी तंत्र पूरी तरह से मीडिया को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। सभी प्राइवेट चैनलों पर इस बात की पूरी ताकीद कर दी गई है कि इस मुद्दे को हाथ से ना निकलने दिया जाए। और साथ ही आरोपी बीएसपी विधायक की गिरफ्तारी के लिए सरकार और पुलिस को मजबूर किया जाए। यहां ये याद दिला दें कि रीता बहुगुणा के घर में आग लगाने के मामले में एक बीएसपी विधायक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपी विधायक का नाम जीतेंद्र सिंह बबलू है। जीतेंद्र सिंह यूपी के बीकापुर से बीएसपी विधायक हैं। इनके अलावा एक बीएसपी नेता इंतज़ार आब्दी और विधायक जीतेंद्र सिंह के कुछ समर्थकों के के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
लखनऊ में यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रीता बहुगुणा के घर 15 जुलाई की रात कुछ लोगों ने आग लगा दी थी। आगजनी की इस घटना में रीता के घर का ज्यादातर सामान और 4 कारें जलकर राख हो गई थीं। रीता और उनके समर्थकों ने आगजनी के लिए बीएसपी कार्यकर्ताओं और विधायक जीतेंद्र सिंह पर आरोप लगाया था। लेकिन शुरू में मायावती ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि आगजनी के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। लेकिन अब बीएसपी विधायक पर केस दर्ज होने से धीरे-धीरे सच्चाई सामने आने लगी है।
मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल के आरोप में 14 दिन की न्यायिक हिरासत काट रहीं रीता बहुगुणा की जमानत याचिका पर आज फिर सुनवाई होगी। शुक्रवार को रीता की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी लेकिन सर्विस टैक्स के मुद्दे को लेकर वकील हड़ताल पर थे। जिसकी वजह से रीता की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी थी।
जहरीली जबान बोलने पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजी गई रीता क्या आज जेल से बाहर आईं। जो अडंगा शुक्रवार को लग गया था, वो आज भी कायम था लेकिन भाग्य की धनी या फिर सियासत की धनी रीता को आखिर जमानत मिल ही गई। रीता पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल के अलावा एससी एसटी एक्ट एक्ट का मामला है। हालांकि उनके वकीलों को भरोसा है कि अगर सुनवाई हुई तो रीता पर लगे आरोप स्टैंड नहीं कर पाएंगे, और हुआ भी वही।
July 18, 2009
कौमार्य परीक्षण या बेइज्जती

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में लड़कियों के कौमार्य परीक्षण पर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो आदिवासी लड़कियों ने शहडोल जिले के पूर्व कलेक्टर समेत तीन अफसरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। सरोज और आरती नाम की इन गरीब लड़कियों की अर्जी चौंकाने वाली है। लड़कियों ने आरोप लगाया है कि जबरन उनका कौमार्य परीक्षण किया गया।
सरोज और आरती उन 150 गरीब लड़कियों में शामिल हैं जिनका साढ़े छह हज़ार रूपये के सरकारी दहेज की खातिर मेडिकल टेस्ट किया गया। आरोप है कि टेस्ट के नाम पर उनके साथ शर्मनाक सुलूक किया गया। एससी/एसटी थाने में सरोज ने शिकायत की है कि मेडिकल टेस्ट को मना करने पर CEO संतोष पटेल ने कहा कि बैगा आदिवासी लड़कियों का क्या भरोसा कि वो कुंवारी हैं या गर्भवती।
फिर महिला चिकित्सक ने उसका मेडिकल चेकअप किया। इससे वो खुद को अपमानित महसूस कर रही है। सरोज की पूरी शिकायत को सहां लिखा नहीं जा सकता। लेकिन उसका एक एक लफ्ज सरकारी अफसरों की बेशर्मी बयान कर रहा था। दूसरी लड़की आरती ने भी बताया कि कैसे शिवराज के राज में लड़कियों के साथ बुरा बर्ताब किया गया। उसका कहना था कि उसके पेट पर हाथ रखकर लेडी डॉक्टर ने चैक किया। उसे ऐसा करना अच्छा नहीं लगा। मुख्यमंत्री बहू बेटी मानते हैं औऱ ऐसा काम करवाते हैं।
सोहागपुर में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत घर बसाने आईं 150 लड़कियों में से 138 को शादी के सरकारी मंडप में तब बैठने की इजाजत मिली जब ये तय हो गया कि वो गर्भवती नहीं हैं। बारह लड़कियां मंडप में नहीं बैठ पाईं क्योंकि वो गर्भवती थीं।
शिकायत के बाबजूद पुलिस ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है। वो सिर्फ जांच का राग अलाप रही है। उनका कहना है कि पूर्व कलेक्टर, जनपद पंचायत के सीईओ औऱ समाज कल्याण कल्याण के खिलाफ़ शिकायत आई है वो जांच कर रहे हैं फिर कार्रवाई करेंगे।
हद तो तब हो गई जब हंगामा मचते ही मध्यप्रदेश महिला आयोग ने तुंरत शिवराज सरकार को क्लीन चिट दे दी। अब राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम शहडोल में लड़कियों के बयान दर्ज कर रही है। और लड़कियां शिकायत की अर्जी लिए शिवराज के अफसरों की तरफ ताक रही हैं कि शायद उन्हे इंसाफ मिल सके। हिन्दुस्तान की संस्कृति औऱ अस्मिता की दुहाई देने वाली बीजेपी। वो हिन्दुस्तान जिसमें औरत को देवी का दर्जा मिलता है। लेकिन शिवराज के राज में अफ़सरों ने दुनिया को दिखा दिया है कि वो औऱत का कितना सम्मान करते हैं।
July 16, 2009
आखिर कब तक ?
दस साल पहले हमने कारगिल युद्ध का सामना किया था। देश ने लगभग 527 जवान खोकर इस युद्ध में दुश्मन देश पाकिस्तान को परास्त कर दिया था। लेकिन नक्सलवाद के रूप में हम न जाने कितने कारगिल जैसे युद्ध लड़ चुके हैं और हमें कोई सफलता भी नहीं मिली है। वैसे तो देश में नक्सलवाद की लड़ाई दो दशक से भी पुरानी है, लेकिन पिछले पांच सालों पर नजर डालें तो तीन हजार से अधिक लोग इस लड़ाई की भेंट चढ़ चुके हैं। इतना ही नहीं हजार से अधिक जवान भी शहीद हो चुके हैं। सिर्फ इस साल ही अब तक 6 महीनों में 230 जवान समेत लगभग 485 लोगों की मौत हो चुकी है। देश में नक्सलवाद पर पेश है एक खास रिपोर्ट..
इस साल सबसे अधिक
देश में नक्सल प्रॉब्लम दिन पर दिन विकराल रूप लेती जा रही है। वैसे तो यह प्रॉब्लम शुरू हुई थी सत्तार के दशक में लेकिन दो दशक पहले इसका हिंसक रूप सामने आया। पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं। इस साल के 6 महीनों में ही 1130 घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि लास्ट इयर सेम पीरियड में 766 मामले सामने आए थे। इतना ही नहीं इस वर्ष अब तक कुछ 485 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 230 जवान और 255 आम नागरिक थे।
37000 सोल्जर्स
नक्सलवाद की यह लड़ाई कितनी बड़ी है इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस समय लगभग 37 बटालियन पैरामिलिट्री फोर्स यानी 37000 सोल्जर्स जंग से लड़ने के लिए लगाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में अधिक
वैसे तो देश के लगभग 12 स्टेट नक्सलवाद की इस समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन छत्ताीसगढ़ में प्रॉब्लम सबसे अधिक सीरियस बनी हुई है। पिछले दिनों में यहां एक नक्सली हमले में एसपी समेत 36 लोगों की जान चली गई थी। यहां की स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पूरे देश में नक्सलवाद से मुकाबले के लिए लगीं कुछ 37 बटालियन में 17 बटालियन यानी 17 हजार जवान अकेले छत्ताीसगढ़ में लगाए गए हैं। साथ ही देश में कुल होने वाली नक्सली घटनाओं में 82 परसेंट घटनाएं छत्ताीसगढ़, बिहार, झारखंड और उड़ीसा में संयुक्त रूप से होती हैं। इसके साथ ही कुल होने वाली कैजुअल्टीज का 77 परसेंट इन्हीं स्टेट्स में हुई हैं।
इतिहास के झरोखे से
नक्सलाइट्स टर्म वेस्ट बंगाल के एक स्माल विलेज नक्सलवारी से आया है। जहां कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया का एक भाग चारू मजूमदार और कानू सांन्याल के नेतृत्व में 1967 में हिंसक हो गया, जिसने सीपीआई लीडरशीप के खिलाफ ही रिवेल्यूशनरी अपोजिशन डेवलप करने की कोशिश की। विद्रोह की शुरुआत 25 मई 1967 में नक्सलबारी विलेज में उस समय हुई जब एक किसान पर भूमि विवाद को लेकर हमला किया गया। मजूमदार चीन के माओ जेडांग से इंस्पायर था और भारतीय किसानों और लोअर क्लास की जमीनों को गिरवी रखने के लिए वह गवर्नमेंट और अपर क्लास को जिम्मेदार ठहराने लगा। इसके बाद नक्सलाइट मूवमेंट का जन्म हुआ। 1967 में नक्सलाइट ने आल इंडिया कोआर्डिनेशन कमेटी आफ कम्युनिस्ट रिवोल्यूशनरीज संगठित किया जो बाद में सीपीआई (एम) में बंट गया। 1969 में एआईसीसीसीआर ने कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (मार्सिस्ट-लेनिनिस्ट) को जन्म दिया। प्रेक्टिकली धीरे-धीर सभी नक्सलाइट ग्रुप्स अपने ओरिजिन सीपीआई (एमएल) से पहचाने जाने लगे। 1980 में तीस नक्सलाइट ग्रुप्स 30 हजार कंबाइंड मेंबरशिप के साथ सक्रिय हुआ। भूमि और सामान्तवाद की यह लड़ाई धीरे-धीरे खूनी जंग का रूप लेने लगी। नक्स्लवाड़ी से पूरा वेस्ट बंगाल फिर उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहारी, छत्ताीसगढ़ के साथ देश के लगभग एक दर्जन राज्यों में यह एक समस्या के रूप में सामने आया।
नक्सल का आतंक बढ़ता ही जा रहा है. नक्सली आए दिन अटैक कर रहे हैं. नक्सली अक्सर खाकी वर्दी को अपना निशाना बनाते हैं. वामपंथी नक्सलवाद देश के 630 डिस्ट्रिक्ट में से 180 को अपनी चपेट में ले चुका है। देशभर में इनके करीब 22 हजार कैडर हैं।
झारखंड
पूरा स्टेट माओवाद की चपेट में, लेकिन 24 में से 16 डिस्ट्रिक्ट बुरी तरह पीड़ित हैं. स्टेट में माओवादियों के छह प्रमुख ग्रुप काम कर रहे हैं. तृतीया प्रस्तुति कमेटी, झारखंड प्रस्तुति कमेटी, द पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया, झारखंड जनसंघर्ष मुक्ति मोर्चा, संयुक्त प्रगतिशील मोर्चा वसीपीआई (एम)।
उड़ीसा
यह स्टेट भी अधिकांश लाल रंग में रंग चुका है, लेकिन कुल 30 डिस्ट्रिक्ट्स में से आंध्र प्रदेश व छत्ताीसगढ़ से सटी सीमा के 17 डिस्ट्रिक्ट माओवाद से भयंकर रुप से ग्रस्त हैं। दक्षिणी उड़ीसा के मलकानगिरि, कोरापुट, रायगढ़, गजपति डिस्ट्रिक्ट्स में इनकी मजबूत उपस्थिति है। आदिवासी बहुल्य कंधमाल में भी अच्छा नेटवर्क है। उड़ीसा के डिस्ट्रिक्ट्स सुंदरगढ़, देवगढ़, संभलपुर बौध और अंगुल में तेजी से फैलाव।
बिहार
इस स्टेट के 38 में से 19 डिस्ट्रिक्ट्स में अच्छा खासा प्रभाव, पहले से इनकी मौजूदगी वाले पटना, गया, औरंगाबाद, भभुआ, रोहतास ओर जहानाबाद के अलावा अब इनका फैलाव उत्तार की तरफ हो रहा है। पश्चिमी चंपारण, पू. चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मघुबनी इनके नए विस्तार क्षेत्र हैं. सहरसा, वेगूसराय, वैशाली और उत्तार प्रदेश से सटे एरियाज में भी इनका प्रभाव है।
छत्ताीसगढ़
30 साल से माओवाद समस्या ने खनिज संपदा से धनी इस स्टेट की हालत को बदतर करने में मेन रोल निभाया है। 10 डिस्ट्रिक्ट्स के 150 पुलिस थाने गंभीर रुप से संवेदनशील. दंतेवाड़ा, कांकेर, बस्तर, बलरामपुर ओर सारगुजा डिस्ट्रिक्ट्स में माओवादियों की जड़े मजबूत।
आंध्र प्रदेश
स्टेट के दंडकारण्य एरिया में इनका खतरा बना हुआ है. विशाखापट्नम, विजयानगरम, खम्माम और पूर्वी गोदावरी डिस्ट्रिक्ट्स में मजबूत नेटवर्क।
महाराष्ट्र
गढ़चिरौली इनका गढ़ है जबकि चंद्रपुर गोडिंया, यवतमाल, भंडारा और नांदेड़ जैसे डिस्ट्रिक्ट नक्सलग्रस्त घोषित। ये सभी जिले आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित एरियाज से सटे हुए हैं।
इस साल सबसे अधिक
देश में नक्सल प्रॉब्लम दिन पर दिन विकराल रूप लेती जा रही है। वैसे तो यह प्रॉब्लम शुरू हुई थी सत्तार के दशक में लेकिन दो दशक पहले इसका हिंसक रूप सामने आया। पिछले पांच सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल सबसे अधिक घटनाएं सामने आई हैं। इस साल के 6 महीनों में ही 1130 घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि लास्ट इयर सेम पीरियड में 766 मामले सामने आए थे। इतना ही नहीं इस वर्ष अब तक कुछ 485 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 230 जवान और 255 आम नागरिक थे।
37000 सोल्जर्स
नक्सलवाद की यह लड़ाई कितनी बड़ी है इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस समय लगभग 37 बटालियन पैरामिलिट्री फोर्स यानी 37000 सोल्जर्स जंग से लड़ने के लिए लगाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में अधिक
वैसे तो देश के लगभग 12 स्टेट नक्सलवाद की इस समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन छत्ताीसगढ़ में प्रॉब्लम सबसे अधिक सीरियस बनी हुई है। पिछले दिनों में यहां एक नक्सली हमले में एसपी समेत 36 लोगों की जान चली गई थी। यहां की स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पूरे देश में नक्सलवाद से मुकाबले के लिए लगीं कुछ 37 बटालियन में 17 बटालियन यानी 17 हजार जवान अकेले छत्ताीसगढ़ में लगाए गए हैं। साथ ही देश में कुल होने वाली नक्सली घटनाओं में 82 परसेंट घटनाएं छत्ताीसगढ़, बिहार, झारखंड और उड़ीसा में संयुक्त रूप से होती हैं। इसके साथ ही कुल होने वाली कैजुअल्टीज का 77 परसेंट इन्हीं स्टेट्स में हुई हैं।
इतिहास के झरोखे से
नक्सलाइट्स टर्म वेस्ट बंगाल के एक स्माल विलेज नक्सलवारी से आया है। जहां कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया का एक भाग चारू मजूमदार और कानू सांन्याल के नेतृत्व में 1967 में हिंसक हो गया, जिसने सीपीआई लीडरशीप के खिलाफ ही रिवेल्यूशनरी अपोजिशन डेवलप करने की कोशिश की। विद्रोह की शुरुआत 25 मई 1967 में नक्सलबारी विलेज में उस समय हुई जब एक किसान पर भूमि विवाद को लेकर हमला किया गया। मजूमदार चीन के माओ जेडांग से इंस्पायर था और भारतीय किसानों और लोअर क्लास की जमीनों को गिरवी रखने के लिए वह गवर्नमेंट और अपर क्लास को जिम्मेदार ठहराने लगा। इसके बाद नक्सलाइट मूवमेंट का जन्म हुआ। 1967 में नक्सलाइट ने आल इंडिया कोआर्डिनेशन कमेटी आफ कम्युनिस्ट रिवोल्यूशनरीज संगठित किया जो बाद में सीपीआई (एम) में बंट गया। 1969 में एआईसीसीसीआर ने कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (मार्सिस्ट-लेनिनिस्ट) को जन्म दिया। प्रेक्टिकली धीरे-धीर सभी नक्सलाइट ग्रुप्स अपने ओरिजिन सीपीआई (एमएल) से पहचाने जाने लगे। 1980 में तीस नक्सलाइट ग्रुप्स 30 हजार कंबाइंड मेंबरशिप के साथ सक्रिय हुआ। भूमि और सामान्तवाद की यह लड़ाई धीरे-धीरे खूनी जंग का रूप लेने लगी। नक्स्लवाड़ी से पूरा वेस्ट बंगाल फिर उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, बिहारी, छत्ताीसगढ़ के साथ देश के लगभग एक दर्जन राज्यों में यह एक समस्या के रूप में सामने आया।
नक्सल का आतंक बढ़ता ही जा रहा है. नक्सली आए दिन अटैक कर रहे हैं. नक्सली अक्सर खाकी वर्दी को अपना निशाना बनाते हैं. वामपंथी नक्सलवाद देश के 630 डिस्ट्रिक्ट में से 180 को अपनी चपेट में ले चुका है। देशभर में इनके करीब 22 हजार कैडर हैं।
झारखंड
पूरा स्टेट माओवाद की चपेट में, लेकिन 24 में से 16 डिस्ट्रिक्ट बुरी तरह पीड़ित हैं. स्टेट में माओवादियों के छह प्रमुख ग्रुप काम कर रहे हैं. तृतीया प्रस्तुति कमेटी, झारखंड प्रस्तुति कमेटी, द पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया, झारखंड जनसंघर्ष मुक्ति मोर्चा, संयुक्त प्रगतिशील मोर्चा वसीपीआई (एम)।
उड़ीसा
यह स्टेट भी अधिकांश लाल रंग में रंग चुका है, लेकिन कुल 30 डिस्ट्रिक्ट्स में से आंध्र प्रदेश व छत्ताीसगढ़ से सटी सीमा के 17 डिस्ट्रिक्ट माओवाद से भयंकर रुप से ग्रस्त हैं। दक्षिणी उड़ीसा के मलकानगिरि, कोरापुट, रायगढ़, गजपति डिस्ट्रिक्ट्स में इनकी मजबूत उपस्थिति है। आदिवासी बहुल्य कंधमाल में भी अच्छा नेटवर्क है। उड़ीसा के डिस्ट्रिक्ट्स सुंदरगढ़, देवगढ़, संभलपुर बौध और अंगुल में तेजी से फैलाव।
बिहार
इस स्टेट के 38 में से 19 डिस्ट्रिक्ट्स में अच्छा खासा प्रभाव, पहले से इनकी मौजूदगी वाले पटना, गया, औरंगाबाद, भभुआ, रोहतास ओर जहानाबाद के अलावा अब इनका फैलाव उत्तार की तरफ हो रहा है। पश्चिमी चंपारण, पू. चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मघुबनी इनके नए विस्तार क्षेत्र हैं. सहरसा, वेगूसराय, वैशाली और उत्तार प्रदेश से सटे एरियाज में भी इनका प्रभाव है।
छत्ताीसगढ़
30 साल से माओवाद समस्या ने खनिज संपदा से धनी इस स्टेट की हालत को बदतर करने में मेन रोल निभाया है। 10 डिस्ट्रिक्ट्स के 150 पुलिस थाने गंभीर रुप से संवेदनशील. दंतेवाड़ा, कांकेर, बस्तर, बलरामपुर ओर सारगुजा डिस्ट्रिक्ट्स में माओवादियों की जड़े मजबूत।
आंध्र प्रदेश
स्टेट के दंडकारण्य एरिया में इनका खतरा बना हुआ है. विशाखापट्नम, विजयानगरम, खम्माम और पूर्वी गोदावरी डिस्ट्रिक्ट्स में मजबूत नेटवर्क।
महाराष्ट्र
गढ़चिरौली इनका गढ़ है जबकि चंद्रपुर गोडिंया, यवतमाल, भंडारा और नांदेड़ जैसे डिस्ट्रिक्ट नक्सलग्रस्त घोषित। ये सभी जिले आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित एरियाज से सटे हुए हैं।
July 15, 2009
तैनाती के लिए तैयार

कभी न खत्म होने वाले इंतजार के बाद ड्राईडॉक, जहां भारत की पहली परमाणु पमडुब्बी निर्मित की जा रही है, के कपाट आखिरकार समुद्र के लिए खोल दिए जाएंगे। विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में एडवांस्ड टेक्लोलॉजी वेस्सल(एटीवी) का उद्घाटन 26 जुलाई को किए जाने की संभावना है। विजय दिवस के रूप में मनाई जाने वाली यत तारीख कारगिल की चोटियों से पाकिस्तानी घुस्पैठियों को हटाए जाने की 10वीं वर्षगांठ है। 6000 टन की पनडुब्बी- जो अर्से से भारतीय प्रतिरक्षा का सबसे गोपनीय रहस्य थी- का उद्घाटन नौसेना और डीआरडाओ की उस संयुक्त परियोजना का हिस्सा, जिसके तहत पानी के भीतर से दुश्मन पर गुप्त परमाणु अस्त्र वार करने में क्षमता विकसित की जानी है। इस पनडुब्बी (रूस की चार्ली समूह का परिश्कृत डिजाइन, जिसे आइएनएस चक्र के तौर पर उपयोग किया) के प्रयोग के साथ ही भारत परमाणु पनडुब्बी का प्रयोग करने वाला दुनिया का छठा देश बन जाएगा। इसकी शुरुआत दो साल पहले उस प्रक्रिया का पहला कदम है जिसके तहत पनडुब्बियों के समुद्री परीक्षण के पहले इनके परमाणु रिएक्टरों और प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। नौसेना डॉकयार्ड में स्थित ड्राईडॉक शिपबिल्दिंग सेंटर में दो और जलपोतों का निर्माण किया जा रहा है।
July 14, 2009
सेना ने फिर बढ़ाया देश का मान
फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस की परेड में भारतीय सेना का प्रदर्शन देखने लायक था। पूरी परेड का नेतृत्व करते हुए भारतीय सेना ने सभी का मन मोह लिया। अपनी चटक चाल और सधे कदमताल से प्रधानमंत्री का सीना दूर देश भी चौड़ा था। इस गर्व के मौके पर भारतीय थल सेना सबसे आगे थी। उसके पीछे नौसेना के जवान और फिर वायुसेना का कौशल काबिले तारीफ था। पात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दो देशों की पांच दिवसीय यात्रा पर पेरिस में हैं। यहां वो राष्ट्रीय दिवस समारोहों के मुख्य अतिथि भी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भारत के लोगों का सम्मान है। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोजी से मुलाक़ात करेंगे। पेरिस में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। गौरतलब है कि भारतीय सेना के कुछ जवान भी फ्रांस की राष्ठ्रीय दिवस परेड में हिस्सा लेने हफ्ते भर पहले ही पेरिस में हैं। इस दौरे के दौरान फ्रांस के साथ व्यापार, निवेश, उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष,परमाणु ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा, संस्कृति और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत करना पर जोर रहेगा।
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पड़ोसी की फिर सपोलों को छोड़ने की तैयारी
पड़ोसी देश पाकिस्तान में मुंबई हमले हमले के गुनहगार और आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के चीफ हाफिज सईद को राहत देने की कोशिश जारी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने हाफिज के खिलाफ चल रहे केस को पाक सुप्रीम कोर्ट से वापस लेने की अर्जी दी है। पंजाब प्रांत की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि, निचली अदालत के फैसले को चैलेंज करने वाली याचिका को रद्द कर दिया जाए। हालांकि इसके बाद पंजाब प्रांत ने इशारा किया है कि चूंकि उनके हाफिज के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं, इसलिए इस मामले को लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं है। खबर ये भी है कि पाकिस्तान के एटॉर्नी जनरल पंजाब प्रांत को समझाने की कोशिश करेंगे कि वो केस वापस लेने की अर्जी न दें। आतंकी हाफिज सईद मुंबई हमले के सिलसिले में पाकिस्तान में नजरबंद है। एक तरफ मुबई हमले के मद्देनजर पाकिस्तान भारत को पूरा समर्थन देने की बात करता है वहीं दूसरी तरफ वो इस तरह के कारनामे कर अपने आतंकी साथियों को पनाह देने से भू गुरेज नहीं करता। पिछले दिनों पारिस्तानी सेना के एक बड़े अफसर के बयान पर अभी बवाल थमा नहीं है कि सरकार ने भी अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं। पता हो कि इस अफसर ने माना था कि सेना और आईएसआई का संबंध आलकायदा जैसे संगठनों से लगातार बना हुआ है।
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July 13, 2009
नक्सलियों के हमले से दो दिनों में दहला देश
असम का सोनितपुर इलाका आज एक जोरदार धमाके से दहल उठा। ये धमाका सेना की एक गाड़ी को निशाना बनाकर किया गया। हादसे में सेना का एक कर्नल और गाड़ी का ड्राइवर शहीद हो गए। ये धमाका आईईडी के जरिए किया गया। हादसा आज सुबह करीब पांच बजे सोनितपुर के रंगापुरा पुलिस स्टेशन के नजदीक हुआ। सेना की मेडकल जिप्सी और एंबुलेंस दिसपुर से टांगा जा रही
राजनांदगांव में नक्सली हमले में शहीद होने वाले पुलिस कर्मियों की तादाद 38 पर पहुंच गई है। कल तक हमले में 36 लोगों की जान गई थी। लेकिन आज मिलने वाली खबरों के मुताबिक हमले के शिकार दो और पुलिसकर्मियों की जान चली गई है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में शोक का मंजर है। राजनामदगांव आज पूरी तरह बंद है। स्कूल, कॉलेज और बाजार पूरी तरह बंद हैं। नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों और अफसरों को श्रद्धांजलि देने के लिए पुलिस के आला अफसर से लेकर आम लोग तक जमा हुए हैं। खबरों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राज्यपाल ई.एस.एल नरसिंम्हन भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने आज राजनांदगांव जाएंगे। नक्सल हमले में शहीद हुए सभी जवान जिला पुलिस और सीआरपीएफ के हैं। इस नक्सली हमले के मद्देनज़र धमतरी ज़िले के अलावा राजनांदगांव और बस्तर मे हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इसके अलावा रायपुर में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है।
राजनांदगांव में नक्सली हमले में शहीद होने वाले पुलिस कर्मियों की तादाद 38 पर पहुंच गई है। कल तक हमले में 36 लोगों की जान गई थी। लेकिन आज मिलने वाली खबरों के मुताबिक हमले के शिकार दो और पुलिसकर्मियों की जान चली गई है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में शोक का मंजर है। राजनामदगांव आज पूरी तरह बंद है। स्कूल, कॉलेज और बाजार पूरी तरह बंद हैं। नक्सली हमले में शहीद हुए जवानों और अफसरों को श्रद्धांजलि देने के लिए पुलिस के आला अफसर से लेकर आम लोग तक जमा हुए हैं। खबरों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राज्यपाल ई.एस.एल नरसिंम्हन भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने आज राजनांदगांव जाएंगे। नक्सल हमले में शहीद हुए सभी जवान जिला पुलिस और सीआरपीएफ के हैं। इस नक्सली हमले के मद्देनज़र धमतरी ज़िले के अलावा राजनांदगांव और बस्तर मे हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इसके अलावा रायपुर में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है।
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