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Varanasi, UP, India
Working with an MNC called Network 18, some call it news channel(IBN7), but i call it दफ्तर, journalist by heart and soul, and i question everything..

June 29, 2009

फिर सरेंडर का ढोंग, राज पहुंचे कोर्ट


मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने कल्याण कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज ठाकरे ऐसा करने को मजबूर हुए हैं। साल 2008 के अक्टूबर में उत्तर भारत से रेलवे की परीक्षा देने आए छात्रों के साथ मारपीट हुई थी। ये मारपीट कल्याण इलाके में हुई थी। आरोप है कि राज ठाकरे के कहने पर एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें परीक्षा देने से रोका था और उनके साथ मारपीट की थी। हाई कोर्ट ने राज ठाकरे से सरेंडर करने को कहा था। अब देखना ये है कि कोर्ट से राज को जमानत मिलेगी या फिर उन्हें जेल जाना होगा।

भड़काऊ भाषण के मामले में राज ठाकरे का कोई सानी नहीं है। कभी मराठा छत्रप बाला साहब ठाकरे के दाहिने हाथ रहे राज ने जब शिवसेना छोड़ महाराष्ट्र नव निर्माण सेना का गठन किया तो उन्हें भी अपनी जमीन बनाने के लिए अपने चाचा की तरह कुछ ऐसा करना था जिससे वो मराठियों का विश्वास हासिल कर सकें। हालिया लोकसभा चुनाव में वो कुछ हद तक सफल भी हो गए थे।

पिछली सुनवाई के समय बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज ठाकरे को आदेश दिया था कि उन्हें हर हाल में कल्याण रेलवे कोर्ट में 29 जून तक सरेंडर करना है। 24 अक्टूबर 2008 को कल्याण रेलवे स्टेशन पर एमएनएस कार्यकर्ताओं ने जमकर मारपीट की थी। आरोप है कि राज ठाकरे के इशारे पर रेलवे की परीक्षा देने आए उत्तर भारतीय छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।

कल्याण कोर्ट में राज के खिलाफ 153बी, 153 सी और 412 के तहत कार्रवाई की गई। तीनों धाराएं गैरजमानती हैं। इसके बाद कल्याण पुलिस ने राज ठाकरे को गिरफ्तार किया और राज ठाकरे को एक दिन जेल में भी बिताना पड़ा। बाद में इसी मामले में राज ठाकरे को कल्याण की निचली अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई। राज्य सरकार ने राज ठाकरे की अंतरिम जमानत को रद्द करने की अपील हाईकोर्ट में की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने राज ठाकरे की अंतरिम जमानत रद्द करते हुए 29 जून तक सरेंडर करने का आदेश दिया।

राज ठाकरे के वकील के मुताबिक जैसे ही राज ठाकरे कोर्ट में सरेंडर करेंगे ठीक उसी वक्त उनकी जमानत की अर्जी भी दाखिल कर दी जाएगी। कल्याण कोर्ट में दायर मुकदमा तो राज ठाकरे के कारनामों का एक छोटा सा नमूना है। उनपर दायर मुकदमों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। ज्यादातर मामलों में भड़काऊ भाषण और माहौल खराब करने के आरोप है। अब देखना ये है कि क्या सरेंडर करने के बाद एक बार फिर राज ठाकरे जमानत हासिल करने में कामयाब हो जाएंगे।

June 25, 2009

पढ़ाई पर छूट के लिए केंद्र, यूपी सरकार में होड़



लगता है मुलायम सिंह का भूत अब सिर चढ़कर बोल रहा है। पहले कपिल सिब्बल और उसके बाद उनकी धुर विरोधी मायावती ने भी मुलायम तेवर दिखाते हुए छात्रों के लिए कुछ खास इंतजाम किए हैं। केंद्र सरकार 10वीं की बोर्ड परीक्षा से बच्चों को मुक्त करने के प्रति गंभीर है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि वो भी इस हक में हैं कि स्कूली बच्चों को 10वीं की परीक्षा के खौफ और तनाव से मुक्त कर देना चाहिए। मानव संसाधन मंत्री ने यहां तक कह दिया कि हमें पूरे एजुकेशन सिस्टम पर फिर से विचार करने की जरूरत है। सिब्बल ने कहा है कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा की बजाय नियमित अंतराल पर टेस्ट होना चाहिए। कपिल सिब्बल ने उम्मीद जताई कि अभिभावक और छात्र सरकार की इस पहल का स्वागत करेंगे। सिब्बल के मुताबिक 10वीं की परीक्षा छात्रों के साथ ही अभिभावकों के भी जी का जंजाल बन गई थी।

इससे पहले उच्च शिक्षा में सुधार के लिए बनाई गई यशपाल कमेटी ने भी कई बड़े बदलावों की जमीन तैयार कर दी है। कमेटी ने सिफारिश की है कि UGC जैसी संस्थाओं को खत्म करके एक राष्ट्रीय आयोग बनाया जाए जो उच्च शिक्षा से जुड़े सभी मामलों को देखे। सरकार ने सौ दिन के भीतर इन सिफारिशों पर अमल करने का वादा किया है।

उधर मायावती ने यूपी बोर्ड में दसवी के छात्रों को भी राहत का ऐलान किया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत 10वीं तक के छात्रों को नंबर गेम से मुक्ति मिल गई है। अब दसवीं तक के बच्चों को केवल परीक्षा पास करनी होगी और इसके एवज में उन्हें ग्रेडिंग पद्धति से आंका जाएगा। ये व्यवस्था साल 2010 से लागू होगी।

June 24, 2009

बारिश ना हुई तो, क्या किसान देंगे लगान


मॉनसून में देरी के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार में सूखे का संकट मंडराने लगा है। बारिश ना होने से जमीन बंजर होने के कगार पर पहुंच गई है और किसानों के सामने सिंचाई का संकट पैदा हो गया है। अगर जल्दी ही बारिश नहीं हुई तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। गन्ने की फसल को पानी नहीं मिल रहा है तो ज्वार और मक्का की फसल पानी बिना बढ़ नहीं पा रही है। इतना ही नहीं पानी की कमी ने आम से उसकी मिठास भी छीन ली है।

बिहार में अबतक मॉनसून ने दस्तक नहीं दी और किसान परेशान हैं। खेत यूं दिख रहे हैं जैसे किसी ने इनमें आग लगा दी हो। बंजर खेतों में जहां थोड़ी बहुत फसल है तो उनमें अनाज के दाने नहीं। जाहिर है बिन पानी बिहार में भी सब सून है। वहीं मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों तक वारिश के कोई आसार भी नहीं। मानसुन के बादल रुठ गये है कड कडाती धुप से धरती का कलेजा फट रहा है बावजुद इसके बादलो का दिल पसीजते नही दिख रहा है और अगर कुछ दीन और यही हाल रहा तो एक-एक बुद पानी के लिये तरस रहे किसान टुट जायेंगे।

यूपी में भी हाल कोई जुदा नहीं। यहां के हरित बेल्ट पर भी सूखा मंडरा रहा है। मई-जून मिलाकर अब तक पश्चिमी
यूपी में सिर्फ 9 मिलीमीटर बारिश हुई है। पंजाब में धान की रोपाई शुरू हो चुकी है। लेकिन यहां सब ठप पड़ा है। अगर जून खत्म होते-होते बारिश नहीं हुई तो हरित बेल्ट को इस बार सूखे से कोई नहीं बचा पाएगा।

बारिश की कमी ने आम की रंगत बदल दी है। न वो महक है, न वो स्वाद। सहारनपुर में लाखों एकड़ में फैले आम के बाग में दशहरी और लंगड़ा सूखे की जद में हैं और इनका आकार बढ़ ही नहीं रहा।

मेरठ, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर के अलावा बुलंदशहर, बागपत और गौतमबुद्धनगर भी सूखे की चपेट में आने लगे हैं। यहां जमीन के नीचे पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। कुल मिलाकार अब सारी उम्मीदें बारिश पर आकर टिक गई हैं। उत्तर भारत में पंजाब और हरियाणा के बाद पश्चिमी यूपी की आर्थिक रीढ़ खेती पर ही निर्भर है। अगर एक हफ्ते भर के भीतर बारिश नहीं हुई तो इस क्षेत्र में हाहाकार मच जाएगा।

वेस्ट की ये धरती सोना उलगने के लिए जानी जाती है लेकिन फिलहाल तो इसका सीना बारिश की एक बूंद के लिए तरह रहा है। तालाब सूख गए हैं, हैंड पंपों में पानी नहीं है और ट्यूबवैल के वाटर लेवल नीचे जाने से इस हरित प्रदेश को सूखा प्रदेश न घोषित करना पड़े।

एल नीनो का प्रभाव

वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून की रफ्तार को थामने के पीछे वजह है एल नीनो। एल नीनो मौसम का एक मिजाज है और जब ऐसे हालात बनते हैं तो दक्षिण एशिया में मॉनसून के हालात खराब हो जाते हैं। सूखे और अकाल की स्थिति बन जाती है।


एल नीनो मौसम का एक मिजाज है। इसके चलते प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है और ये दक्षिण अमेरिका से दक्षिण एशिया की तरफ बहने वाली हवाओं की रफ्तार धीमी कर देता है। इस वजह से मॉनसून की ताकत कमजोर पड़ जाती है और सूखे की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा जब प्रशांत महासागर का पानी गर्म होकर ऊपर उठता है तो यह अपने ऊपर से गुजरने वाली हवाओं को भी गर्म कर देता है। इसमें सूखी हवा ज्यादा होती है। मॉनसून की पानी बरसाने वाली नमी सूख जाती है और मॉनसून कमजोर पड़ जाता है। इसलिए एल नीनो बारिश का दुश्मन है। जिस साल वो आता है, भारत समेत दक्षिण एशिया के बड़े इलाके में सूखा, अकाल और तबाही लेकर आता है।

इससे पहले 2004 और 2002 में भारत में मॉनसून पर अल नीनो का असर पड़ा था। तब बारिश काफी कम हुई थी। जो आमतौर पर होने वाली बारिश से भी 10 फीसदी कम थी। इस साल भी मॉनसून का मूड अच्छा नहीं है। दक्षिण एशिया में एल नीनो की आशंका जताई जा रही है। और इसका मतलब होगा सूखा, अकाल, महंगाई, नाउम्मीदी और गरीबी।

सरबजीत को फांसी की सजा बरकरार

सरबजीत सिंह को आज पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा बरकरार रखी। इससे सरबजीत को काफी धक्का लगा है। भारत सरकार पिछले कई दिनों से सरबजीत को छुड़ाने के प्रसास कर रही थी। भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह जिन्हें मनजीत सिंह के रूप में भी जाना जाता है पाकिस्तान के कोट लखपत जेल में बंद है। उनके ऊपर 1990 में लाहौर और मुलतान में सिलसिलेवार बम धमाके करवाने का आरोप है। इन बम धमाकों में आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की मौत हो गई थी। सरजीत का कहना है कि वो केवल एक किसान है। जो कि पाक सीमा के पास के गांव में रहता है। सरबजीत को उनके पहले के इकबालिया बयान के मद्देनजर एंटी टेररिस्ट कोर्ट मे 1991 को सजा-ए-मौत सुनाई गई थी। इस सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को कायम रखा। राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने मार्च 2006 को उनकी माफी की याचिका ठुकरा दी थी। पाकिस्तान ने सरबजात को फांसी की सजा को भारतीय अनुरोध के बावजूद बरकरार रखा गया है। सरबजीत को 29 अप्रैल 2008 को फांसी की सजा सुनाई गई थी। वो पिछले 18 साल से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। आज जब पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में सरबजीत की अर्जी खारिज हुई, तब सरबजीत के वकील अदालत में मौजूद नहीं थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाजिर रहने को कहा था।

June 17, 2009

स्टेम सेल का वरदान, ठीक होगा डायबिटीज



अब आपके द्वारा ही होगा आपका इलाज

जी हां डायबिटीज के मरीजों के लिए ये बहुत बड़ी खबर है। ऐसे लोग जो डायबिटीज के शिकार हैं उनके पैरों में अक्सर घाव हो जाता हैं। इन घावों का भरना काफी मुश्किल होता है। नौबत पैर काटने तक की आ जाती है। मगर अब जल्दी ही स्टेम सेल थेरेपी के जरिए ऐसा इलाज शुरू होने वाला है जो मरीज को अपाहिज होने से बचा सकता है। और इसके लिए फोर्टिस अस्पताल को इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च से इजाजत भी मिल चुकी है।

6 महीने, सिर्फ 6 महीने और उसके बाद डायबिटीज के मरीजों को मिल सकता है नया जीवन। उनकी तकलीफों से मिल सकता है हमेशा के लिए छुटकारा। उनके इलाज के लिए भारत में पहली बार आ रही है एक नई तकनीक - स्टेम सेल थेरेपी। ये थेरेपी क्या है और ये कैसे डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होगी ये भी हम आपको बताएंगे। मगर पहले आपको बताते हैं वो हकीकत जिससे डियबिटीज के मरीज परेशान रहते हैं।

ऐसे मरीजों को एक खतरा हमेशा बना रहता है। और वो है पैरों में घाव यानि फुट अल्सर का। इसका इलाज आसान नहीं है। वजह साफ सी है कि डायबिटीज के मरीजों के घाव मुश्किल से भरते हैं क्योंकि उस हिस्से में रक्त संचार रुक जाता है। और अगर वो घाव पैर में हो जाए तो फिर मरीज का चलना फिरना भी दूभर हो जाता है। कभी कभी तो पैर काटने तक की नौबत आ जाती है।

मगर अब स्टेम सेल थेरेपी से डियबिटीज के मरीजों को जल्दी ही इस मुसीबत से छुट्कारा मिल सकता है। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च यानि आईसीएमआर ने फोर्टिस अस्पताल को थेरेपी पर काम करने की इजाजत दे दी है। भारत में शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल के लिए 36 मरीज़ों को चुना गया है। इन सभी मरीज़ों को डायबेटिक फुट अल्सर है। इनमें से 12 मरीज़ों का इलाज इस नई थेरेपी से किया जाएगा। बाकि मरीज़ों का इलाज पुराने तरीके यानि ऐन्टीबॉयोटिक और मरहम-पट्टी से किया जाएगा।

साथ-साथ किए जा रहे इस इलाज के दौरान पता लगाया जाएगा कि स्टेम सेल थेरेपी, इलाज के पुराने तरीके से कितनी ज़्यादा कारगर है। भारत को एक लंबे वक्त से ऐसी थेरेपी की जरूरत थी क्योंकि दुनिया भर के डियबिटीज मरीजों में से 4 करोड़ भारत में ही हैं। देखा जाए तो देश के हर तीसरे परिवार में डायबिटीज़ का कोई न कोई मरीज मिल जाएगा।

ये एक ऐसा मर्ज़ है जिसे रोका नहीं जा सकता। इसकी सीधी वजह है भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने पीने का गिरता स्तर। बढ़ता तनाव, ज़्यादा वज़न, शराब और धूम्रपान की लत। और डायबेटीज़ आपके शरीर को अंदर से कमज़ोर बना देता है। बीमारी से लड़ने की आपकी शक्ति को धीरे-धीरे खत्म करता जाता है। ऐसे में अगर फुट अल्सर हो जाए तो मुसीबत दुगनी हो जाती है।

इस वक्त डॉक्टरों के पास मौजूद तकनीक के मुताबिक डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज एन्टीबायोटिक और मरहम-पट्टी से किया जाता है। लेकिन इसमें 6 से 9 महीने तक का वक्त लग जाता है। कभी कभी तो हालात इतने खराब हो जाते हैं कि मरीजों को अपने पैर तक कटवाना पड़ता है। इसके अलावा ये इलाज काफी महंगा भी है - इसमें 2 से ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। इतना सब होने का बाद भी डायबिटीज़ का मरीज ज़िन्दगी भर अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता।

मगर अब इन सारी परेशानियों से मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। स्टेम सेल थेरेपी के जरिए डायबिटिक फुट अल्सर के मरीज़ों को अपने पैर नहीं कटवाने पड़ेंगे। पूरे इलाज के बाद वो दोबारा अपने पैरों पर चल सकेंगे। डॉक्टरों की ये कोशिश अगर कामयाब हो गई तो डायबिटिज के मरीजों के चेहरे पर मुस्कुराहट फिट लौट आएगी।

कोरिया और जर्मनी में क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं... 6 महीने में भारत में आम जनता के लिए उपलब्ध हो जाएगी। अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर स्टेम सेल थेरेपी से फुट अल्सर का इलाज होगा कैसे। तो हम आपको बता दें कि इसमें मरीज के शरीर से ही स्टेम सेल को निकालने के बाद उससे दवा बनाई जाएगी। फिर उस दवा को इंजेक्शन की शक्ल में दोबारा मरीज के घाव वाले हिस्से में लगाया जाएगा। यानि डायबिटिक मरीज के शरीर में ही छुपा है उसकी तकलीफ का इलाज।

डायबिटिक मरीजों में पैरों के अल्सर के लिए स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल जल्दी ही शुरु होने वाला है। स्टेम सेल थेरेपी यानि विज्ञान का वो पहलू जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी। ऐसा तरीका जिसमें किसी इंसान के मर्ज को ठीक करने के लिए उसके ही शरीर से दवा निकाली जाती है। अब आपके शरीर से ही स्वस्थ सेल निकालकर वापस आपके शरीर में डाले जाते हैं। इसी को स्टेम सेल थेरेपी कहा जाता है। ये थेरेपी के दौरान कुछ खास सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इंसान के खून में मौजूद इन सेल्स को स्टेम सेल्स कहा जाता है।

भारत में डायबिटिक फुट अल्सर के मरीजों का इलाज करने के लिए अब स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले पहले मरीज़ के शरीर में मौजूद स्टेम सेल की मात्रा को बढ़ाना होगा। इसके लिए शरीर में खास Gmcfs नाम के 4 इंजेक्शन दिए जाएंगे। इन इंजेक्शन्स को देने पर स्टेम सेल की मात्रा बढ़ जाएगी। इसके बाद शरीर से खून निकाला जाएगा। फिर खून में से स्टेम सेल्स को बाकि सेल्स से अलग किया जाएगा। अलग किए गए इन स्टेम सेल्स को 50 छोटी-छोटी डोज़ बनाई जाएंगी। इन्हें अलग-अलग इंजेक्शन के माध्यम से पैर के उस हिस्से में डाला जाएगा, जहां अल्सर हुआ है।

इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया में दर्द होने की संभावना होने की वजह से मरीज़ को स्पाइनल एनेसथीसिया दिया जाएगा। इसके लिए मरीज़ को एक दिन के लिए अस्पताल में एडमिट भी होना होगा। स्टेम सेल पैर में पहुंचने के बाद धीरे-धीरे बढ़ना शुरू कर देंगे। स्वस्थ सेल्स की मात्रा बढ़ते ही पैर के अल्सर वाले हिस्से में रक्त का संचालन शुरू हो जाएगा। और जल्द ही मरीज़ का पैर ठीक हो जाएगा और वो चलने के काबिल हो जाएगा।

स्टेम सेल में दो खासियत हैं। पहली ये कि ये सेल रीजेनेरेट करते हैं। यानि खुद-ब-खुद बढ़ने या मल्टिप्लाई करने की क्षमता रखते हैं। और दूसरा ये कि ये सेल आसानी से किसी और सेल की शक्ल ले सकते हैं। यानि मर्ज़ जिस भी तरह के सेल में हो, स्टेम सेल - उसी सेल की स्वस्थ शक्ल ले सकते हैं।

स्टेम सेल यानि ऐसी ताकत जो इंसान के अपने शरीर में छुपी होती है। डॉक्टरों ने इसे पहचाना और अब ये दुनिया के सामने आ गई है। उसके बाद सामने आया फुट अल्सर का इलाज करने का तरीका। इसकी जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि डायबिटीज मरीजों में पैरों के घाव का वक्त पर इलाज न होने से शरीर के दूसरे हिस्सों में फैसले का खतरा बना रहता है जो बाद में गैंगरीन का रूप ले सकता है। मगर अब इलाज के लिए मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा।

मरीज के शरीर से ही दवा बनाकर उसका इलाज करने का ये तरीका वाकई कारगर साबित हो सकता है। बहरहाल सवाल ये है कि अगर शुगर के मरीजों के पैर के घाव इस तरीके से ठीक किए जा सकते हैं तो क्या स्टेम सेल की मदद से डायबिटीज को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है। दुनिया भर के डॉक्टर भी इन दिनों इसी सवाल से जूझ रहे हैं।


स्टेम सेल थेरेपी से फुट अल्सर के इलाज के सवाल के साथ ही ये सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या डायबिटीज के शिकार मरीज के बाकी हिस्सों के घाव का भी इससे इलाज हो सकता है। और क्या डायबिटीज का पूरा इलाज भी इससे हो सकता है। दुनिया भर के डॉक्टर इस दिशा में काम भी कर रहे हैं। मगर अभी तक कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है। हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी दर्दनाक हकीकत जो डियबिटीज के मरीजों का दर्द बयान करेगी।

हर साल डायबिटीज के 4 फीसदी मरीजों को पैरों में घाव हो जाते हैं। 45 से 75 फीसदी मामलों में डायबिटीक मरीजों के पैर काटने पड़ते हैं। दुनिया भर में 1 करोड़ डायबिटिक मरीजों के शरीर का कोई हिस्सा काटने की नौबत आ जाती है। 2030 तक भारत में तकरीबन 10 करोड़ डायबिटीज मरीजों को फुट अल्सर का खतरा होगा। फुट अल्सर के ऐसे मरीजों के लिए अगर स्टेम सेल थेरेपी कारगर साबित होती है तो वाकई ये विज्ञान की एक बड़ी जीत होगी। देश के करोड़ों डायबिटीज मरीजों के लिए ये वरदान साबित हो सकती है। वैसे विदेश में

इस वक्त में ल्यूकेमिया के लिए स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें स्टेम सेल के बोन मैरो ट्रान्सप्लांट के ज़रिए निकाला और वापस शरीर में डाला जाता है। आने वाले वक्त में वैज्ञानिक स्टेम सेल थेरेपी को कैंसर, पार्किनसन, और मल्टिपल सेरोसिस जैसी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल में लाने पर काम कर रहे हैं।

भारत में फुट अल्सर के लिए स्टेम सेल थेरेपी की दिशा में 6 महीने में नई क्रांति आ सकती है। उसके बाद ये कोशिश भी हो सकती है कि स्टेम सेल से डायबिटीज का इलाज खोजा जाए। मुमकिन है कि आने वाले वक्त में ऐसा कोई तरीका आ जाए कि डायबिटीज को जड़ से खत्म किया जा सके।

अगर फायदा हो रहा है तो तो बवाल तो होना ही है। स्टेम सेल थेरेपी को लेकर दुनिया भर के देशों में काफी वक्त से बवाल मचा हुआ है। इंसान के शरीर से स्टेम सेल निकालने के तरीकों को लेकर तो अमेरिका में काफी विरोध प्रदर्शन भी हुआ नतीजा ये हुआ कि पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने तो ऐसी रिसर्च पर रोक लगा दी थी।

दुनिया भर में स्टेम सेल रिसर्च हमेशा से ही विवादों में घिरा रहा है। और विवाद की वजह है खुद स्टेम सेल। वही कोशिकाएं जिनमें किसी भी बीमारी का इलाज करने की ताकत है। ये बेशकीमती सेल जीने की आस छोड़ चुके लोगों को नई जिंदगी देते हैं। ये सेल सबसे ज़्यादा मात्रा में इंसानी भ्रूण यानि एम्ब्रियो में पाए जाते हैं।


यानि किसी महिला के गर्भ में पल रहे 4 से 5 दिन के बच्चे में। तकनीकी तौर पर इस 4-5 दिन के एम्ब्रियो को शिशु कहना गलत होगा। लेकिन ये भी सच है कि ये जीवन की शुरुआत है। यही भ्रूण 9 महीनों में मां के पोषण पर विकसित होकर एक नवजात शिशु की शक्ल लेता है। इस एम्ब्रियो से स्टेम सेल निकालने के दो तरीके हैं। पहला इस एम्ब्रियो को मारना और दूसरा इसका क्लोन बना लेना।

अमेरिका में जब वैज्ञानिकों ने पहले तरीके का इस्तेमाल कर इस थेरेपी में रिसर्च करनी शुरू की तो आम लोगों का गुस्सा भड़क गया। कहा गया कि उन्हें मां के गर्भ में 4 से 5 दिन के भ्रूण को मारना अपराध है।

विरोध इतना उग्र हुआ कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश ने अपने कार्यकाल के दौरान साल 2001 से 2006 तक स्टेम सेल रिसर्च के लिए सरकारी फन्डिंग बंद कर दी। साथ ही इंसानों पर इसके प्रयोग या क्लीनिकल ट्रायल पर भी पाबंदी लगा दी। लेकिन सत्ता बदली और 9 मार्च 2009 को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने स्टेम सेल रिसर्च को सरकारी मदद का ऐलान कर दिया।

स्टेम सेल निकालने का दूसरा तरीका है एम्ब्रियो को मारे बगैर उसका क्लोन बना लेना। लेकिन इस तकनीक के गलत इस्तेमाल की बहुत गुंजाइश होने की वजह से इस पर सभी देशों में पाबंदी है। यानि इस सेल की ये शक्ति ही इसके गलत इस्तेमाल की वजह बन सकती है। इसी वजह से भारत में एम्ब्रियो से स्टेम सेल निकालकर रिसर्च करने की इजाजत जरूर है मगर इसके लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।


भारत और अमेरिका के अलावा फिलहाल ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, इजरायल, बेल्जियम, फिनलैंड, ग्रीस, निदरलैंड्स, स्वीडन और युनाइटिड किंगडम में एम्ब्रियो से स्टेम सेल निकालकर रिसर्च करने की इजाजत है। वहीं ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नॉर्वे, पोलैंड और आयरलैंड इसके सख्त खिलाफ हैं। इतने विवाद के बावजूद इस बात को कोई नहीं नकार सकता कि स्टेम सेल में जो शक्ति है वो किसी और सेल में नहीं। और ऐसे में इलाज के इस बेहतरीन तरीके को इस्तेमाल में ना ला पाना पूरी दुनिया के लिए एक बहुत नुकसानदायक साबित होगा। तमाम मुश्किलों के बीच स्टेमल सेल की ताकत का इस्तेमाल करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक हल तलाशा। अब दुनिया भर के वैज्ञानिक अडल्ट स्टेम सेल के ज़रिए ही इस थेरेपी से अलग-अलग बीमारियों का इलाज ढूंढ रहे हैं। डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज भी इन्हीं अडल्ट स्टेम सेल की मदद से किया जाएगा।

June 16, 2009

Sarv Shiksha Abhiyaan struggling in Varanasi....


Banaras…the city of burning ghats, temples, handicrafts and desi cuisines. Apart from this identity Varanasi holds another distinct separate identity. As said by the founder of Banaras Hindu University, late Pt. Madan Mohan Malviya, Varanasi is, “sarv vidya ki rajdhani”, i.e. the capital of education. Banaras Hindu University was formed with a view to develop education not only in the region but also in the country.

Speaking of education, hundred years after the inception of this university, not much has changed in the region. Just a few kilometres away from this magnificent university are a couple of primary and middle high government schools in the villages of Tikri and Tarapur. These schools are struggling with the minimum infrastructure that the government has provided. Some changes to the extent of expansion of classrooms and newly painted walls have come but they are not significant.

These schools lack basic infrastructure like electricity, books, teachers, uniform and even classrooms. In this digital age where France has declared access to internet to be the birth right of every citizen, our country fails to provide even books.

Local constraints are also hampering the development of these schools. Midday meals provided here is as everywhere, not up to the edible standards. Even newly constructed rooms for the schools are used by the principals to store their household scraps. To my surprise, the principal of Tarapur primary school had put a lock on the newly build toilet especially for the girl students. On enquiring the reason, the school principal says, “students make it dirty, so we keep it locked”.

Education system has to develop in India atleast to secure its future, but for development both the sides of the coin i.e., the government and society have to work together, failing which India fails as a nation.


BY TUSHAR

June 15, 2009

कटान के खतरे से जूझ रहा रामनगर का ऐतिहासिक किला


गंगा के सामनेघाट के पास बढ़ रहे बालू के टीले की ऊंचाई ने रामनगर किले को कटान के खतरे की जद में ला खड़ा किया है। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, राउरकेला से नदी (गंगा) और बालू के बीच संबंधों पर अध्ययन करने आए शोध छात्र रवि गेड़ा, गोपाल साउ, रोशन कुमार का यही कहना है। यहां पीपा पुल के माध्यम से गंगा की बदलती चौड़ाई, नदी की गहराई, उसका वेग और बालू जमाव प्रक्रिया का तकरीबन 20 दिनों तक गहन अध्ययन के बाद बीएचयू के गंगा अन्वेषण केंद्र में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में छात्रों ने कहा है कि रामनगर किला के निकट गंगा की गहराई बढ़ती जा रही है। सामनेघाट पर नदी की गहराई जहां 1.2 मीटर है वहीं उस पार किला के निकट इसकी गहराई 3.61 मीटर हो गई है। बीच में बालू का टीला है जिसकी चौड़ाई 150 मीटर है। इस टीले के पहले सामनेघाट पर नदी की चौड़ाई 145 मीटर है जबकि बालू के टीले के बाद रामनगर तक नदी की चौड़ाई 350 मीटर है। इसका मतलब यह हुआ कि किला अधिकतम मृदाक्षरण के क्षेत्र में है और इसकी गहराई सतही जल की अधिकतम तीव्रता को दर्शाता है।

नदी का सिद्धांत कहता है कि सतही जल का वेग, नदी की गहराई और भूमिगत जल का रिसाव एक साथ-एक जगह पर हो वह सबसे ज्यादा कटाव क्षेत्र मियड्रींग जोन होता है। रामनगर के निकट भी तीनों प्रक्रिया तेजी से जारी है। बीच गंगा में बालू का जमाव जैसे-जैसे बढ़ता जाएगा किले के निकट गहराई बढ़ती जाएगी। इसके लिए वे कछुआ सेंचुरी के चलते बालू खनन पर रोक को मुख्य कारण मानते हैं।

उल्लेखनीय है कि वाराणसी में गंगा तट पर पूर्वी छोर पर स्थित रामनगर किला काशी के राजाओं का निवास रहा है। यहां संग्रहालय भी है जिसमें हाथी के स्वर्ण, रजत के हौदे, राजसी पोशाक के साथ ही पुराने अस्त्र-शस्त्र हैं। लगभग 25 एकड़ आयताकार क्षेत्र में स्थित किला में चकिया, अहरौरा और चुनार की पहाड़ियों से लाए गए पत्थरों का प्रयोग किया गया। इस किले को देखने के लिए देशी-विदेशी पर्यटक रोज काफी संख्या में पहुंचते हैं।

शोधार्थियों ने सामनेघाट के निकट बालू के टीले की बढ़ती चौड़ाई और दो धाराओं में बटती जा रही गंगा को देखने के बाद अपनी रिपोर्ट में कछुआ सेंचुरी के बाबत 10 जिज्ञासाएं जाहिर की है।

1-जल के किन-किन रासायनिक अवयवों को कछुआ अपने किन-किन क्रियाकलापों से शुद्ध करता है। अथवा उन्हें कैसे व्यवस्थित करता है?

2-कछुओं का यह क्रिया-कलाप स्थिर पानी में ज्यादा होता है अथवा गतिशील पानी में?

3-संसार के किस गतिशील जल संसाधन को कछुआ शुद्धिकरण पद्धति में शामिल कर सेंचुरी घोषित किया गया?

4-बाढ़ के दिनों में कछुआ अपने उपर लगने वाले गति ऊर्जा की व्यवस्था कैसे कर एक ही स्थान पर एक ही क्षेत्र में रह पाता हैं?

5-गर्मी के दिनों में यदि यह माना जाए कि गंगा का प्रवाह वाराणसी में 6 हजार क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड है तो दिन भर में तकरीबन 52 करोड़ घनफीट जल गंगा में प्रवाहित होता है। इसमें महज एक फीसदी ही अवजल मिश्रण का अनुपात माना जाए (वास्तविकता में इससे कहीं अधिक है) तो दिन भर में तकरीबन 52 लाख घनफीट अवजल प्रवाहित होता है। इस जल की मात्रा और कछुओं की संख्या का अनुपात कैसे लगाया जाता है। साथ ही यह कैसे कहा जा सकता है कि गंगा जल को शुद्ध करने के लिए कितने कछुओं की जरूरत होगी?

6-कछुए क्रिया कर जल को शुद्ध करते है तो इस क्रिया की कुछ न कुछ प्रतिक्रिया भी होगी। विज्ञान का सिद्धांत भी है कि जहां क्रिया होगी वहां उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। इस कछुआ सेंचुरी के कारण प्रतिक्रिया का आंकलन कभी किया गया?

7-वाराणसी का बालू क्षेत्र कब सेंचुरी घोषित हुआ? तब से अब तक इसका क्या-क्या इंपेक्ट एसेसमेंट हुआ है? इसका आंकलन किसने किया और क्या इसकी रिपोर्ट का प्रकाशन सर्व साधारण तक पहुंचा?

8-सेंचुरी घोषित होने के बाद बालू का खनन बंद हो गया। लोगों ने बताया कि जो जलजीव बराबर गंगा में दिखाई पड़ते थे, विलुप्त हो गए। ऐसा क्यों हुआ। क्या इसकी कभी जांच कराई गई। क्या इसका कारण कछुआ है?

9-बालू क्षेत्र के सेंचुरी घोषित होने से पहले और बाद के वर्षो में गंगा जल की गुणवत्ता की तुलनात्मक जांच कराई गई?

10-गंगा में नदी-नालों और भूमिगत जल द्वारा अवजल आने की मात्रा बढ़ती जा रही है। केंद्रापसारी दबाव (नदी के बीच का वेग) के कारण ये अवजल गंगा के शहरी किनारे पर ही जमा रहते हैं। क्या कछुओं की अधिकतम संख्या गंगा के किनारे होती है? गंगा रिसर्च सेंटर के कोआर्डिनेटर प्रो. यूके चौधरी का कहना है कि शोध छात्रों के जिज्ञासा भरे इन सवालों को भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय को भेजा जा रहा है। जाहिर है जिसने दर्द दिया दवा भी वही देगा!

June 10, 2009

IDEA IIFA AWARDS 2009 Nominations


Best Picture



* A Wednesday
* Dostana
* Ghajini
* Jodhaa Akbar
* Race
* Rock On !!
Direction


* A.R. Murugadoss - Ghajini
* Madhur Bhandarkar - Fashion
* Abhishek Kapoor - Rock On !!
* Ashutosh Gowariker - Jodhaa Akbar
* Neeraj Pandey - A Wednesday


Performance in a leading role (male)


* Aamir Khan - Ghajini
* Abhishek Bachchan - Dostana
* Hrithik Roshan - Jodhaa Akbar
* Naseeruddin Shah - A Wednesday
* Shahrukh Khan - Rab Ne Bana di Jodi


Performance in a leading role (female)


* Aishwarya Rai Bachchan - Jodhaa Akbar
* Asin - Ghajini
* Bipasha Basu - Race
* Katrina Kaif - Singh Is King
* Priyanka - Fashion


Performance in a supporting role (Male)


* Abhishek Bachchan - Sarkar Raj
* Arjun Rampal - Rock On !!
* Irrfan Khan - Mumbai Meri Jaan
* Sonu Sood - Jodhaa Akbar
* Vinay Pathak - Rab Ne Bana Di Jodi


Performance in a supporting role (Female)


* Bipasha Basu - Bachna Ae Haseeno
* Ila Arun - Jodhaa Akbar
* Kangana Ranawat - Fashion
* Kirron Kher - Dostana
* Shahana Goswami - Rock On !!


Performance in a comic role


* Abhishek Bachchan - Dostana
* Anil Kapoor - Race
* Rajpal Yadav - Bhoothnath
* Shreyas Talpade - Welcome To Sajjanpur
* Tejpal Singh - Jodhaa Akbar
* Tushar Kapoor - Golmaal Returns


Performance in negative role


* Akshaye Khanna - Race
* Imran Khan - Kidnap
* Paresh Rawal - Oye Lucky Lucky Oye
* Pradeep Rawat - Ghajini
* Visswa Badola - Jodhaa Akbar


Music Direction


* A.R. Rahman - Ghajini
* A.R. Rahman - Jodhaa Akbar
* Pritam - Race
* Shankar, Ehsaan and Loy - Rock On !!
* Vishal Shekhar - Dostana
Best Story
* Abhishek Kapoor - Rock On !!
* Haidar Ali - Jodhaa Akbar
* Madhur Bhandarkar, Anuradha Tewari and Ajay Monga - Fashion
* Neeraj Pandey - A Wednesday
* Shiraz Ahmed - Race


Lyrics


* Anvita Dutt Guptan- Khuda Jaane - Bachna Ae Haseeno
* Jaideep Sahni - Haule Haule - Rab Ne Bana Di Jodi
* Javed Akhtar - Jashan-e-Baharaa - Jodhaa Akbar
* Javed Akhtar - Socha hai - Rock On !!
* Sameer- Pehli Nazar Mein - Race


Playback Singer (Male)


* Atif Aslam- Pehli Nazar Mein - Race
* Farhan Akhtar - Socha hai - Rock On !!
* Javed Ali - Jashan-e-Baharaa - Jodhaa Akbar
* KK- Khuda Jaane - Bachna Ae Haseeno
* Sukhwinder Singh- Haule Haule - Rab Ne Bana Di Jodi


Playback Singer (Female)


* Bela Shinde - Man Mohana - Jodhaa Akbar
* Monali - Zara Zara Touch Me - Race
* Shilpa Rao - Khuda Jaane - Bachna Ae Haseeno
* Shreya Ghoshal - Teri Ore - Singh Is Kinng
* Sunidhi Chauhan - Desi Girl - Dostana

आइफा : लोग जुड़ते रहे कारवां बनता गया


बस चंद घंटो की बात है। चंद घंटों में एक खूबसूरत जमीन पर शिरकत करेंगे भारतीय सितारे। दस साल पहले शुरु हुए एक सफर का एक और नया आगाज। भारतीय सिनेमा की दुनिया के मंच पर एक नई दस्तक। चंद घंटों में सितारों के स्वागत में बांहें फैलाएगा रेड कारपेट। दुनिया की तमाम खूबसूरत जगहों में से एक चीन के मकाउ में हस्तियों की होगी शिरकत..सितारों का लगेगा जमावड़ा...और नई सदी में बॉलीवुड की नई रचनात्मकता का होगा नायाब अंदाज।
महज चंद घंटों के बाद पूरी दुनिया जानेगी कि कौन है पिछले 10 सालों में भारतीय सिनेमा का सबसे चमकता सितारा। लेकिन आज आपको ले चलेंगे आइफा के दस साल के सफर के कुछ रोमांचक पल...वो पल जिसे न तो आइफा के आयोजक भुला पाए और न ही दस साल से आइफा की कोशिश से जुड़े वो लोग जो भारतीय सिनेमा को दुनिया के सबसे रुपहले पर्दे पर देखना चाहते हैं...तो आईए इस अनोखे सफर की शुरुआत उस साल से करते हैं जब आइफा का जन्म हुआ था...
हर बड़े काम की शुरुआत एक छोटी सी सोच के साथ होती है। काम बड़ा होता जाता है और सोच भी बड़ी होती जाती है। आइफा के साथ भी ऐसा ही हुआ था। सोच ये थी कि किसी भी तरह एक ऐसा मंच तैयार करना चाहिए जिससे भारतीय सिनेमा को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके। सोच अच्छी थी। लेकिन मंच पर लाना उतना ही मुश्किल था। पर हौसला बुलंद था। लिहाजा हुआ वहीं जो हौसे ने चाहा। आईफा..यानी International Indian film academy award की शुरुआत साल 2000 में हो गई। Wizcraft International Entertainment pvt ltd ने इसके नेतृत्व का जिम्मा संभाला। ये तो आपको बताने की जरुरत भी नहीं है कि इस अवार्ड के ब्रांज अंबेसडर हैं सदी के महानयक अमिताभ बच्चन। खैर जब अवार्ड की शुरुआत हुई तो सबसे पहला सवाल ये था कि इसे देश बाहर किस जगह पर आयोजिक किया जाए। क्योंकि सवाल ये था कि पहला आयोजन अगर मशहूर जगह पर नहीं हुआ तो वो मकसद पूरा नहीं होगा जिसके लिए आइफा की शुरुआत की जा रही है। लेकिन जल्दी ही ये समस्या भी दूर हो गई। London का The millenium dome पहली नजर में ही आयोजकों को पसंद आ गया। फिर क्या था आइफा का पहला आयोजन लंदन में धूम धाम से शुरु हुआ। पहले समारोह की खास बात ये थी कि इसमें बॉलीवुड ही नहीं दुनिया के भी जाने माने सितारों ने हिस्सा लिया। कायली मिलॉग...Jackie chan...Angelina Jolie....ये कुछ ऐसी हस्तियां थी जो इस समारोह की खास शोभा थीं... लेकिन आइफा का पहला साल सही मायने में हम दिल दे चुके सनम और ताल के नाम रहा..इस साल ऐश्वर्या को बेस्ट एक्ट्रेस और संजय दत्त को बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला था। और उस साल की बेस्ट फिल्म थी..संजय लीला भंसाली की हम दिल दे चुके सनम...खैर, ये तो पुरस्कारों की बात थी। पहला साल था आइफा का लिहाजा परफॉर्मेंस के लिहाज से कोई कमी नहीं छोड़ी गई...रवीना टंडन का वो अंदाज आज भी लोगों को याद है.. फिर सोनाली बेंद्रे का जलवा...और महिमा चौधरी ने तो सबका दिल ही जीत लिया...
ये था आइफा के पहले साल का जलवा..वो कोशिश, एक कशिश पैदा कर के चली गई। और खुशी की बात ये है कि पहले साल में पैदा हुई कशिश आने वाले दिनों में भी जवान होती गई। अब देखिए आइफा के दूसरे आयोजन के वक्त अंतरराष्ट्रीय माहौल कितना बदल गया था।
साल 2000 में पहले आइफा समारोह की कामयाबी के बाद आयोजकों का उत्साह काफी बढ़ गया। बॉलीवुड के सितारे भी खुश थे..क्योंकि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा इसके जरिए उनकी एक नई पहचान बनी। अब दिक्कत ये थी कि पहले समारोह की तरह दूसरे समारोह की भव्यता को बनाए रखा जाए। लिहाजा फिर एक बार बढ़िया से बढ़िया जगह की तलाश की गई। और इसी तलाश में जब आयोजक Sun city, South Africa पहुंचे तो सबने एक साथ कहा दिल कहे रुक जा रे रुक जा...यहीं पर कहीं..जो बात इस जगह है कहीं भी नहीं... कुछ इस तरह 2001 के आइफा पुरस्कार समारोह के लिए Sun city, south africa को चुन लिया गया। इस समारोह में पहली बार आइफा वर्ल्ड प्रिमियर हुआ जिसमें आमिर की बहुचर्चित फिल्म लगान दिखाई गई। इसके बाद लगान ऑस्कर की Best Foreign film category में भी नॉमिनेट हुई। इस समारोह की एक और खास बात ये रही कि इसे Host किया था तब की मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा और कबीर बेदी ने। इस समारोह में सबसे चर्चित फिल्म थी कहो ना प्यार है। और इस फिल्म के हीरो ऋतिक रौशन ने तो अपने Performance से स्टेज पर समा ही बांध दिया था। 2001 के आइफा के नायक थे ऋतिक रौशन जिन्हें बेस्ट एक्टर के पुरस्कार से नवाजा गया। और फिल्म फिजा के लिए करिश्मा कपूर को बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड दिया गया। बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड लेने वाली करिश्मा कपूर ने स्टेज पर जो कमाल किया उसकी एक झलक हम आपको अभी दिखा देते हैं। आज इतने सालों बाद कहते हैं कि जब भी करिश्मा को उस परफॉर्मेंस की दिलाई जाती है तो बहुत भावुक हो जाती हैं। खैर इसके साथ ही एक खास बात थी उर्मिला मातोंडकर के साथ। करिश्मा की तरह अपने Performance से उर्मिला ने भी लोगों का दिल जीत लिया था। कई बार जल्द मिली कामयाबी बाद में बहुत दिक्कत पैदा करने लगती है। लेकिन आइफा के आयोजकों के साथ ऐसा नहीं हुआ। मकसद अपने अगले सफर पर चलता रहा।
आइफा के दो सालों की कामयाबी ने आयोजकों के उत्साह को और बढ़ाया। पिछले दो सालों की तरह इस बार जगह के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। क्योंकि अब आइफा एक स्थापित नाम हो चुका था। हालांकि इस बार आयोजक कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे। साल 2002 के आइफा समारोह के लिए मलेशिया के नाम को चुना गया। अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर मलेशिया में जो भी गया वो उसका कायल हो कर रह गया। फिल्म कांटे का म्यूजिक रीलिज...फिल्म आंखें का वर्ल्ड प्रीमियर....और फिल्मी सितारों के साथ एक ऐसी शाम जिसे आजतक समारोह में शामिल कोई भी शख्स भूला न सका। आइफा का ये साल पिछले सालों से कहीं कम रंगीन नहीं था.. आप सोच सकते हैं कि आइफा के आयोजक कितने उत्साह में थे कि इस साल उन्होमो आइफा का एक औऱ कदम आगे बढ़ा दिया। साल 2002 में आइफा फोरम की शुरुआत कर दी गई। थीम पर आधारित कार्यक्रमों की एक नई शुरुआत। थीम थी टैलेंट और टेक्नोलॉजी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अदला बदली। आइफा के इस तीसरे समारोह की Host थी लारा दत्ता.. इस साल आमिर खान को उनकी लगान फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिया गया। और तब्बो तीसरे आइफा अवार्ड की बेस्ट एक्ट्रेस करार दी गई। इतना ही नहीं..बिपाशा बसु..लगान की हिरोइन ग्रेसी सिंह..और अर्जुन रामपाल को face of the year का अवार्ड दिया गया। ये सारी बातें खास तो थीं ही। लेकिन सबसे चर्चा में रहा सुष्मिता सेन का Performance... और रही सही कसर अपने Performance के जरिए ईशा कोपीकर संजय दत्त और राइमा सेन ने पूरा कर दिया...
 
भारतीय सिनेमा का ये पहले से दस्तूर रहा है कि जो प्रयोग एक बार सफल हुआ वो बार बार दोहराया जाता है। लेकिन आइफा के मंच पर ऐसा कभी नजर नहीं आया..इसमें हर आयोजन में कुछ नया करने की ललक थी..यही वो खास बात थी जो साल दर साल आइफा को एक नई पहचान देती चली गई... पहचान अच्छी तरह स्थापित हो चुकी थी। और चौथे साल आइफा फिर पहुंचा दक्षिण अफ्रीका। लेकिन इस बार दक्षिण अफ्रीका की जगह बदल गई थी। अब आइफा का जलवा जोहान्सवर्ग में बिखरने जा रहा था। हालांकि हमेशा की तरह इस साल भी आइफो को कुछ नया करना था। लिहाजा IIFA Foundation Charity Cricket Match का आयोजन किया गया। इस साल इस अवार्ड के Host थे अनिल कपूर और दीया मिर्जा। लेकिन इस अवार्ड की सबसे खास बात थी लीला भंसाली की फिल्म देवदास...जो करीब करीब आइफा के सारे अवार्ड लेने में कामयाब रही। बेस्ट एक्टर, बेस्ट एक्ट्रेस से लेकर बेस्ट डायरेक्टर तक। जाहिर है ऐसा बहुत कम ही होता है जब एक फिल्म इतने सारे अवार्ड लेकर जाती है। खैर, ऐसा भी बहुत कम ही होता है जब बहुत सारे स्टार एक साथ एक मंच पर शिरकत करते हैं। इस समारोह में सैफ, रानी, शिल्पा, अक्षय कुमार, सलमान खान ने तो अपने Performance से कमाल ही कर दिया... खैर, आइफा का ये चौथा साल भी जबर्दश्त ढंग से गुजरा...अब पांचवे साल यानी 2004 का आइफा एक बार फिर मलेशिया में आयोजित किया गया। ये अपने आप में अनोखा समारोह था..क्योंकि इसमें 450 से भी ज्यादा सेलीब्रिटी ने हिस्सा लिया। आइफा के पांचवे समारोह में करन जौहर की फिल्म कल हो न हो और राकेश रौशन की कोई मिल गया का बोल बाला रहा। रीतिक बेस्ट एक्टर...प्रीति बेस्ट एक्ट्रेस और परफॉर्मेंस में तो प्रीति जिंटा से लेकर शाहरुख खान ने कमाल ही कर दिया..... लेकिन ये तो सिर्फ पांच सालों की कहानी..अगले सालों में आइफा ने क्या किया। आगे भी आपको बताते हैं.....


साल 2004 में आइफा का पांचवां समारोह मलेशिया में आयोजित किया गया था। ये वो साल था जब आइफा हर लिहाज से एक अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका था। पिछले साल की तरह इस साल भी चैरिटी मैचों का सिलसिला जारी रहा। पिछले साल क्रिकेट का चैरिटी मैच खेला गया था..लेकिन इस साल इसकी जगह फुटबॉल मैच ने ले ली। और इस समारोह में करीब 450 सेलीब्रिटी ने हिस्सा लिया। खैर, आइफा के पांचवे समारोह में करन जौहर की फिल्म कल हो न हो और राकेश रौशन की फिल्म कोई मिल गया का बोल बाला रहा। जाहिर है ऋतिक को बेस्ट एक्टर...और प्रीति को बेस्ट एक्ट्रेस के पुरस्कार से नवाजा गया। रही बात इस साल के परफॉर्मेंस की तो प्रीति जिंटा से लेकर शाहरुख खान ने कमाल ही कर दिया..
आइफा का सफर बढ़ता रहा। जिस तरह पांच साल धमाकेदार अंदाज में गुजरा कुछ ऐसे ही छठा साल भी आइफा धूम मचाने की तैयारी में था। आइफा 2005 का ये साल था। इस बार आयोजन एम्सटरडम में किया गया। इस बार भी ओलंपिक स्टेडियम में मैच का आयोजन हुआ। क्रिकेट की दो टीमें बनाईं गईं। एक कप्तान थे शाहरुख खान और दूसरी टीम के कप्तान थे ऋतिक रौशन..ऋतिक की टीम जीत गई औऱ बादशाह खान हार गए। लेकिन समारोह का Host करते हुए शाहरुख ने सारी कसर पूरी कर ली। इस समारोह का होस्ट शाहरुख..फरदीन और करन जौहर ने किया था। अभिषेक बच्चन के लिए ये पहला साल था जब उन्होंने कोई International performance किया। उनके इस परफॉरमेंस में ऐश्वर्या और अमिताभ बच्चन ने भी साथ दिया। वैसे तो पूरे समारोह में फिल्म परीणिता का प्रीमियर भी चर्चा में रहा। लेकिन वीर जरा और हम तुम की झोली में कई पुरस्कार गए। शाहरुख को वीर जारा के लिए प्रीति को हम तुम के लिए परुस्कृत किया गया। इसी समारोह में आयशा ताकिया को बेस्ट डेब्यू अवार्ड भी दिया गया। और इस साल करीना, अनिल कपूर, अरशद वारशी ने तो कमाल ही कर दिया... यानी आइफा का छठा साल भी शानदार रहा।
अब बारी थी सातवें साल की। यानी आइफा 2006 की। इस साल आइफा पहुंचा दुबई। और यहां खास बात ये रही कि भारत, पाकिस्ता, मलेशिया और बांग्लादेश के करीब दस हजार प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया...इस साल जगमोहन मुद्रा की प्रोवोक्ड का प्रीमियर आइफा में हुआ। औऱ सबसे बड़ी बात ये रही कि इसी साल से आइफा में IIFA Foundation Fashion Extravegenza की शुरुआत की गई। इस समारोह में भी एक बार फिर संजय लीला भंसाली सबकी नजरों में समाए रहे। क्योंकि उनकी फिल्म ब्लैक ने सबको अपनी ओर खींच रखा था....
2006 के IIFA का सफर बड़े ही शानदार तरीके से चलता रहा.. दुबई के IIFA में धूम तब मच गई जब अमिताभ बच्चन को ब्लैक के लिए बेस्ट ऐक्टर और रानी मुखर्जी को बेस्ट ऐकट्रेस के खिताब से नवाजा गया। एक ऐसा लम्हा जिसे अमिताभ शायद ही कभी भूल पाए..और एक ऐसी फिल्म जिसे आप भी शायद कभी भूल पाएं.. इंडियन फिल्म एकेडमी एक ऐसी एकेडमी बन चुकी थी जिसने इंटरनेश्नल प्लैटफॉर्म पर अपना एक अलग मकाम हासिल कर लिया था.. दिन पर दिन IFFA की धूम बढ़ती ही जा रही थी...और इस साल स्टेज पर दिखे कई सितारे...जिसमें सबसे ज्यादा धूम मचाई अक्षय कुमार और कटरीना कैफ ने..जिनके हर अंदाज और हर ठुमकों पर लाखों कुर्बान हो गए..और इसी के साथ IFFA का दुबई का सफर खत्म हुआ
और साल 2007 में IIFA पहुंच गया यॉर्कशॉयर..य़ॉर्कशायर की जमीन पर सितारे कदम रख चुके थे..और फिर यहीं से शुरू हुआ वो सफरनामा जो 3 दिनों तक चला.. यॉर्कशायर का IIFA रहा श्री केश मुखर्जी के नाम..और पूरे आइफा में छाए रहे आमिर खान और संजय दत्त..उनकी रंग दे बसंती और मुन्ना भाई फिल्म ने खूब दमाल मचाया। इसी IIFA में ऋतिक को कृष के लिए बेस्ट ऐक्टर और रानी मुख्रजी को कभी अलविदा न कहना के लिए बेस्ट ऐक्ट्रेस का ताज पहनाया गया..इतना लंबा IIFA का सफर चलता ही जा रहा था..एक ऐसा सफर जिसपर चलने से किसी को कोई ऐतराज नहीं..इस साल भी बॉलीवुड के सितारों के बीच खैल गया एक चैरेटी क्रिकेट मैच...यॉर्कशॉयर का वो स्टेज जहां कई सितारे थिरकते हुए नजर आए...जिसमें से इमरान हाशमी, आफ्ताब, रिया सेन के अलावा अक्षय कुमार का वो जलवा दिखा जो उनके फैन्स को आजतक याद रहा..
आईफा का 2008 का पड़ाव था थायलैंड..पूरे 9 साल का सफर अब तय होने जा रहा था।.. इन नौ सालों में आइफा बन चुका था दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी फिल्म ऐकेडमी। इसके अलावा Iifa सबसे ज्यादा दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित करने में कामयाब हुआ..क्योंकि आइफा के नौंवे समारोह के बारे में माना जाता है कि 60 करोड़ लोगों ने देखा। 2008 के Iifa अवॉर्ड में बच्चन परिवार की धूम रही..और इस समारोह में प्रीमियर भी हुआ तो राम गोपाल वर्मा की फिल्म सरकार राज का। इस साल का Iifa सिर्फ फिल्मों, और परफॉर्मेंस तक ही सीमित नहीं रहा..यहां शुरू हुआ फैशन का दौर और पेश किए गए कई भारतीय और थाइलैंड के डिजाईनर्स के डिजाइन्स.. जिनको सजाया गया बॉलीवुड के सितारों के बदन पर..IIFA का स्टेटस काफी उपर पहुंच चुका था..वहां जहां से नीचे देख पाना था काफी मुश्किल..इस साल की ऐंकरिंग की भूमन इरानी और रितेश देशमुश ने थाईलैंड में चर्चा में रहीं .Love story 2050 और अक्षय की सिंह इज किंग.. लेकिन अवॉर्ड गया चक दे इंडिया को..शाहरुख खान को बेस्ट एक्टर.. और करीना कपूर को जब वी मेट के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। करीना ने स्टेज पर भी साबित किया कि उनके जैसा कोई नहीं...पर बादशाह खान यहां भी बादशाह थे...और शिल्पा शेट्टी यहां भी बिग बॉस पर जब ऋतिक स्टेज पर आए तो समां ही बदल गया...आगे का रंग भरने के लिए तो गोबिंदा तैयार थे ही...3 दिन का सफर कब खत्म हुआ पता ही नहीं चला.. IIFA का सफर चलता रहा और फिर एक साल बाद आ गया है वो लम्हा जिसमें आइफा चुन रहा एक दशक का सबसे बड़ा स्टार...एक दशक की सबसे बड़ी अभिनेत्री और एख दशक का सबसे बड़ा निर्देशक....
और आज आइफा में सितारों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। आज अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय, जावेद अख्तर, आशुतोष गोवारिकर समेत कई हस्तियां मकाऊ के लिए रवाना हुई। ये सभी हांगकांग होकर मकाऊ के लिए रवाना हुए। आइफा समारोह कल से चीन के मकाऊ में शुरू हो रहा है, और शनिवार तक चलेगा। हम आपको यहां ये भी बता दें कि आइफा के इस दसवें समारोह की खास बात ये है कि इस बार..एक दशक के सबसे बेहतरीन अभिनेता, अभिनेत्री और निर्देशक को भी अवॉर्ड दिया जाएगा।

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